हम सोचते हैं न कई बार कि हम आलसी हैं या सिर्फ़ अनाड़ी हैं इसीलिए हम किसी भी काम में डूबते नहीं हैं, लोग असफल हो जाते हैं। छात्र होते हैं वो असफल हो जाते हैं, वो पढ़ाई नहीं कर पाते ठीक से। लोग नौकरी करते हैं, नौकरी नहीं कर पाते ठीक से। काम में डूब नहीं पाते। जो वजह है, वो कौशल, वग़ैरह का अभाव नहीं है, उसकी ज़्यादा गहरी वजह मनोवैज्ञानिक है। आपको स्वयं से ज़्यादा उस विषय को याद रखना होगा, डूबने के लिए ज़रूरी होता है कि अहंकार को भुलाया जाए।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। आचार्य जी, आज का जो सत्र था, मैं ये देख पा रही हूँ कि जीवन की सारी समस्याओं का समाधान देता है क्योंकि हम जीवन में बहुत कुछ कर रहे होते हैं, लेकिन डूब के कुछ भी नहीं करते हैं। जैसे ए, बी, सी, डी कर रहे हैं, तो ए से — जब बी में जाते हैं, तो आधा ए चलता रहता है दिमाग में, और बी से सी में जाते हैं, तो पिछला चलता रहता है, और ये जानते हुए कि मैं अभी जो कर रही हूँ, इसमें पूरा करना है। लेकिन फिर भी पिछला चलता रहता है क्योंकि उसको अच्छे से नहीं किया, और ये एक तरह की मसल मेमोरी बन गई है — हमेशा पिछले में जीने की, या फिर जो आने वाला है वो दिमाग में चलता रहता है। तो इसको कैसे दूर करूँ?
मतलब, ये आपके सत्रों से जुड़ के काफी हद तक समझा है कि ये मेरी गलती है। और जैसे बहुत सारी चीज़ें जीवन में लाई, बहुत कुछ बदला है फिर भी ये जो चीज़ है कि खो जाती हूँ, कि जहाँ पर हूँ, वहाँ 100% नहीं दे पाती हूँ।
आचार्य प्रशांत: जब आप बी पर हैं, जो ए की याद आ रही है, वो तो एक तरह का कम्पेन्सेशन




