काली कौन हैं? शराब-माँस पर विवाद क्या? || आचार्य प्रशांत (2022)

प्रश्नकर्ता: नमस्कार आचार्य जी, अभी कुछ दिनों से मैं एक घटनाक्रम को फॉलो कर रहा था। जिसमें एक महिला फिल्ममेकर (चलचित्र निर्माता) हैं जिन्होंने माँ काली पर एक डॉक्यूमेंट्री रिलीज करी है, बनाई है। जिसके पोस्टर पर उन्होंने माँ काली को बीड़ी या सिगरेट पीते हुए दिखाया है। जिस पर काफ़ी विवाद छिड़ा हुआ है।
उसी पोस्टर पर बंगाल की एक सांसद हैं जिन्होंने ये कहा है कि आई हैव एवरी राइट टू इमेजिन काली एज़ ए मीट कंज्यूमिंग एंड अल्कोहल ड्रिंकिंग गॉडेस। (मुझे अधिकार है काली को माँस और शराब पीने वाली देवी के रूप में कल्पना करूँ) और इस बात पर काफ़ी गरमा-गरम विवाद छिड़ा हुआ है। तो मैं जानना चाह रहा था कि पहली बात तो माँ काली हैं कौन और उनका माँस और मदिरा से क्या सम्बन्ध है?
आचार्य प्रशांत: देखो, जो पूरा शाक्त पंथ ही है न, वो प्रकृति को जानने, समझने और उसकी उपासना करने का है। और क्या हैं माँ काली, ये समझने के लिए जो सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसमें देवी महात्म्य की पूरी चर्चा है, जिसमें खुलकर बताया गया है कि दुर्गा कौन, अंबिका कौन, काली कौन, गौरी कौन, सरस्वती कौन; उस पर जाना पड़ेगा।
ये जितनी भी देवियाँ हैं, ये सब प्रकृति की प्रतीक हैं। प्रकृति की शक्तियों की प्रतीक हैं। तुमको थोड़ा-सा धीरज के साथ सुनना पड़ेगा, अगर जानना चाहते हो कि माँ काली कौन हैं। उसके बाद फिर हम इस पर भी आ जाएँगे कि ये कहना कि वो बीड़ी-सिगरेट या माँसाहार या मदिरा-पान से सम्बन्धित हैं, कितना ठीक है।
तो तीन चरित्र हैं दुर्गा सप्तशती में। जो इसमें तीसरा चरित्र है, उत्तर चरित्र बोलते हैं इसको, वो पाँचवें अध्याय से उसके तेरहवें अध्याय तक जाता है, दुर्गा सप्तशती ग्रंथ के। क्या है उसमें, इस तीसरे चरित्र में जिसका सम्बन्ध काली से है।






