जो कुछ लिखा तूने

Acharya Prashant

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जो कुछ लिखा तूने

जो कुछ लिखा तूने, उसे मिट के मिटा

जो पास है तेरे, उसे खुद से बचा

जो बोया है तूने, उसे जड़ से हटा

जो बोया नहीं तूने, उसे अपना खून पिला

जो तेरी कमाई है, उसे आग दे लगा

जो कमाया नहीं तूने, उसे कभी न गँवा

जो याद में घूमे, उसपे धूल उड़ा

जो याद ना आए, उसमें जी के दिखा

जो आंखें भर आएँ, ज़रा हँस के दिखा

जो हँसाता हो तुझे, उसे मौन बता

जो कुछ समझा तूने, उसे भूल ही जा

जो समझ के बाहर है, उसे सर दे झुका

~ आचार्य प्रशांत (2018) [object Object]

This article has been created by volunteers of the PrashantAdvait Foundation from transcriptions of sessions by Acharya Prashant
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