जो मंत्रों और मंत्रजाप में रुचि रखते हों, उनके लिए || आचार्य प्रशांत, वेदांत पर (2021)

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, महामृत्युंजय मंत्र का जाप क्या मदद कर सकता है कुछ वृत्तियों को काबू करने के लिए? क्योंकि वृत्तियों से मुक्ति ही सत्य की ओर ले जा सकती है और यह जाप भी बंधनों से मुक्ति के लिए जाना जाता है।
आचार्य प्रशांत: 'जाना जाता है,' किसके द्वारा? बाई हूम ऐंड फॉर हूम (किसके द्वारा और किसके लिए)? महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ पता है आपको? अर्थ पता हुए बिना अगर आप जाप करते रहेंगे तो कोई फ़ायदा नहीं होगा। और अर्थ भी अगर आपको बस शाब्दिक अर्थ पता है, शाब्दिक अर्थ इतना ही है कि जैसे पक जाने पर, पूरी तरह से परिपक्व हो जाने पर फल बेल से अलग हो जाता है, बिना किसी कष्ट के। वैसे ही बढ़िया जीवन बिताकर के मैं भी अलग हो जाऊँ, मृत्यु के समय पर। अगर आप इसका शाब्दिक अर्थ ही करेंगे तो उससे कौनसा आपको आध्यात्मिक लाभ हो जाएगा? क्योंकि शाब्दिक अर्थ में तो कोई विशेष बात है ही नहीं।
देखिए, अगर आप मेरे संपर्क में रहे हैं, मुझे सुनते रहे हैं, मैंने अनगिनत बार कहा है, “बिना अर्थ जाने कुछ भी दोहराने से कुछ नहीं मिलेगा, एकदम कुछ नहीं मिलेगा।” हाँ, क्या मिल सकता है अधिक-से-अधिक? उथला सा एक आत्मविश्वास, आत्मसांत्वना, जिसको आप आत्मप्रवंचना भी बोल सकते हैं कि ख़ुद को बता दिया कि हम तो आध्यात्मिक हैं क्योंकि हम फ़लाने मंत्र का जाप करते हैं। ये विचार आपके पास जहाँ से भी आया है, इसे त्याग दें। अक्सर तो इस तरह के विचार औने-पौने गुरुओं द्वारा ही प्रचारित किये जाते हैं। 'ये फ़लाना मंत्र है, इसका ऐसे जाप करो, ये करो, वो करो। दिन में तीन बार, एक बार खाने से पहले, एक बार खाने के बाद, दूध के साथ लेना मंत्र।' कुछ होगा?
मंत्र चेतना के एक बहुत ऊँचे बिंदु से निकलते हैं न, मंत्र माने श्लोक। उपनिषदों का हर श्लोक एक मंत्र है। वो चेतना के एक बिंदु से आते हैं और इसलिए आते हैं ताकि आपकी चेतना भी वहाँ उठ सके। उठने का तरीक़ा क्या है? मंत्र का अर्थ कीजिए, उस अर्थ का मनन कीजिए, समझिए कि बात क्या है।








