जो इज़्ज़त नहीं दे सकते, उनसे बात क्या करनी || आचार्य प्रशांत (2021)

प्रश्नकर्ता:(प्रश्नकर्ता को हकलाने की समस्या है) गुरूजी को सादर प्रणाम। शुरू से लोगों से बात करने पर बहुत ज़्यादा डर लगता है। जब मैं किसी ज़्यादा पढ़े-लिखे से बात करता हूँ। तब जुबान लड़खड़ाने लगती है।देश, समाज, संस्कृति, को देखकर बहुत कुछ करना चाहता हूँ। बचपन से देश के बारे बहुत कुछ सोचता हूँ।पर बोलने की प्रॉब्लम (समस्या) से ख़ुद की बातों को ढंग के तरीके से समझा नहीं पाता हूँ।
बोलते टाइम लगता है कि ख़ुद की बात को समझा नहीं पाता तो सामने वाले के सामने बे-इज़्ज़ती हो जाएगी।सामने वाला कमज़ोर समझेगा तो वो चीज़ को देखकर बहुत कम बोलता हूँ मैं, धन्यवाद।
आचार्य प्रशांत: क्या नाम है? ऐसे ही बता दो। नाम बता दीजिए(स्वयंसेवक से पूछते हैं)
स्वयंसेवक: जी इनका नाम हर्ष है; हर्ष अग्रवाल।
आचार्य: हर्ष यहाँ इतने लोग बैठे हुए हैं, ठीक है; और इतना मैं भरोसा करता हूँ कि यहाँ बैठकर मेरे सामने, मुझ ही से झूठ नहीं बोलेंगे।
(अन्य श्रोताओं से पूछते हुए) जब हर्ष बोल रहा था तो आपने सुना, आपके मन में कुछ भाव उठे होंगे। किसी के मन में यह भाव आया कि यह बे-इज़्ज़ती की चीज़ है? और कई अन्य प्रकार के भाव भले ही आये होंगे।किसी को भी, यह भाव आया क्या कि ये जो बोल रहे हैं, उसमें कोई अपमान है, कोई बेइज़्ज़ती जैसी चीज़ है? कुछ ऐसा हुआ क्या?



