जिस चीज़ को मज़ा बोलते हो और जिस चीज़ को बेमज़ा बोलते हो, जिसको सुख बोलते हो, जिसको दुख बोलते हो दोनों को समझो कि ये मामला चल क्या रहा है, और इस समझने में जो मौज है, वो आनंद है। तो दुख भी चल रहा है तो उसको समझो — दुख में भी आनंदित रहोगे, और सुख चल रहा है तब तो समझो ही समझो। कुछ भी चल रहा है, जो भी चल रहा है उसको समझो — वो आनंद है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: आइ’एम एक्सपेरिमेंटलिस्ट। वी डू एक्सपेरिमेंट इन सेमिकंडक्टर्स। सो, वी यूज़ टॉक्सिक गैसेज़ देयर। ऐंड नाउ, इंडिया इज़ ऑल्सो कमिंग टू अ सेमिकंडक्टर इंडस्ट्री, ऑल अराउंड गुजरात एंड समव्हेयर एल्स। सो, ऐज़ ऐन एक्सपेरिमेंटलिस्ट, देयर इज़ अ डुअलिटी इन मी व्हेन आइ डू एक्सपेरिमेंट्स। आइ यूज़ टॉक्सिक गैसेज़, आइ’एम हार्मिंग द एनवायरनमेंट, बट आइ लाइक डूइंग इट। सो, इट्स फीडिंग माइ माइंड।
एक मज़ा आता है करने के लिए, इसलिए कर रहे हैं। बट वो डुअलिटी रहती है कि ये हार्म भी कर रहा है। सो,आइ डोंट नो हाउ टू कम आउट ऑफ़ इट? आइ कांट लीव इट।
आचार्य प्रशांत: ऑलराइट, लेट्स गो इंटु हिस्ट्री एंड सी कैसी–कैसी चीज़ों में लोगों को मजा आता था। ये मजा तो क्या है वो भी एक टाइम, प्लेस और सोसायटी की बात है न। कभी किसी को किसी चीज़ से मजा आ रहा है, क्योंकि उसको बता दिया गया है कि मजेदार है।
अभी उस दिन मैं उदाहरण दे रहा था, कि हमको पता है कि हम बार–बार




