जिस तन लगिआ इश्क़ कमाल, नाचे बेसुर ते बेताल।
जिसे प्रभु से पूर्ण प्रेम हो जाता है, वह आनन्दमय मस्ती में आकर बेसुर और बेताल नाचने लग जाता है।
दरदमन्द नूं कोई न छेड़े, जिसने आपे दुःख सहेड़े।
उस वेदना भरे जीव को कोई क्या तंग करेगा, जिसने स्वयं अपने लिए दुख संजो लिये हैं।
जम्मणा जीणा मूल उखेड़े, बूझे अपणा आप खिआल।
दुखों का वरण करने वाला जन्म और मरण को उखाड़ फेंकता है, और वह अपनी हस्ती को स्वयं पहचान लेता है।
जिस तन लगिआ इश्क़ कमाल, नाचे बेसुर ते बेताल।
जिसे प्रभु से पूर्ण प्रेम हो जाता है, वह आनन्दमय मस्ती में आकर बेसुर और बेताल नाचने लग जाता है।







