जगदीश चंद्र बोस: भारतीय वैज्ञानिक जो दो नोबेल पुरस्कार के हकदार थे

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इस युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें असली अध्यात्म और विज्ञान दोनों की अत्यंत आवश्यकता है। मानो यह दोनों एक पक्षी के दो पंखों के समान हैं, किसी के भी अभाव में उड़ान संभव नहीं। हमारे समाज को मूल्यों का परिवर्तन, और एक आंतरिक क्रांति चाहिए।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
बात है 1895 की। एक भारतीय वैज्ञानिक ने अपना नया आविष्कार दिखाने के लिए कुछ दोस्तों को दावत पर बुलाया।
वे दिखाना चाहते थे कि कैसे रेडियो वेव्स दीवार को भी पार कर सकती हैं। उन्होंने एक प्रयोग करके दिखाया, जिसमें एक कमरे में घंटी बजाने से दूसरे कमरे में बारूद में विस्फोट हो गया। सभी दोस्त चकित रह गए!
ये प्रयोग सफल हो पाया उनके आविष्कार - “मर्करी कोहेरर रेडियो वेव रिसीवर” की वजह से। उस रात जाने-अनजाने में उन्होंने वायरलेस कम्युनिकेशन की नींव रख दी।
हम जिस भारतीय वैज्ञानिक की बात कर रहे हैं वो हैं - जगदीशचन्द्र बोस। और उस रात उनके घर आए दोस्तों में से एक थे - गुग्लिल्मो मार्कोनी।
आज श्री जगदीशचन्द्र बोस की पुण्यतिथि है। आइए उनसे मिलते हैं:
➖ जगदीशचंद्र बोस का जन्म बंगाल में हुआ। स्कूली शिक्षा और कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे लंदन विश्वविद्यालय में प्राकृतिक विज्ञान का अध्ययन करने गए।



