ध्यान और प्रेम, इनके सामने ये जाति जैसा कचरा टिकेगा क्या? तो अगर जाति हटानी है तो इनको ही लाना पड़ेगा — एक ध्यान और एक प्रेम।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्कार सर, मैं किरोड़ीमल का छात्र हूँ। मैं सेकंड ईयर में बीकॉम प्रोग्राम कर रहा हूँ। सर, मेरा कहना है कि धर्म साफ़ है या नहीं? क्या ये सिर्फ़ एक दृष्टिकोण का ज़रिया रह चुका है? क्योंकि एक एग्ज़ाम्पल जैसे क़ुरान, इसी को लेके किसी ने सूफ़िज़्म बना दिया और किसी ने इसी को लेके एक आई॰एस॰एस॰ बना दी। क्या धर्म साफ़ है या नहीं? ये सिर्फ़ एक इंटरप्रिटेशन का ज़रिया रह चुका है।
आचार्य प्रशांत: बढ़िया, बहुत अच्छा। इंटरप्रिटेशन मत कहो, उसको नियत बोलो। नियत।
प्रश्नकर्ता: यस सर।
आचार्य प्रशांत: नियत की बात है। मैं आपको ये दे दूँ (हाथ में एक कपड़ा उठाते हुए), है ना? इससे आप ऐसे माथा पोंछ सकते हो और इसी को आप जाकर किसी के ऐसे लगाकर (मुँह पर लगाकर) उसकी जान ले सकते हो।
प्रश्नकर्ता:




