इन हरकतों से देवी प्रसन्न हो रही हैं? || आचार्य प्रशांत, दुर्गा सप्तशती - प्रथम चरित्र (2022)

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, आजकल नवरात्रि के दिन चल रहे हैं। और मैं देख रहा हूँ कि बहुत समय से जितने विडियोज़ हैं उनपर नवरात्रि से जुड़े प्रश्न आ रहे हैं लोगों के। उसमें से एक प्रश्न था जो मुझे लगा कि काफ़ी ज़रूरी है आपके सामने उसे रखना। और ये एक युवक का प्रश्न था सिद्धार्थ नाम है उनका। वो पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं।
तो क्योंकि देश में मेरे ख़याल से नवरात्रि अगर सबसे धूमधाम से कहीं बनाई जाती है तो पश्चिम बंगाल ही है, और उसी के विषय में कुछ बातें वो बता रहे थे। उनका कहना था कि हर साल ये जो दिवस है ये पूरी तैयारियों के साथ मनाया जाता है। दो-दो महीने पहले से ही लोग कपड़े खरीदना शुरू कर देते है। और जो बाज़ार है उसमें आप पायेंगे कि जो पीक सेल्स का समय होता है वो नवरात्रि के समय पर ही आता है। और साथ-साथ देखते हैं कि कुछ विकृति भी है इसमें। जैसे कि उन्होंने एक ऐड देखा था जहाँ पर एक लड़का और एक लड़की जो है नवरात्रि के एक पंडाल में खड़े है, और जैसे की माता के सामने फूल अर्पित किये जाते हैं वो व्यक्ति माता की जगह एक युवती को वो फूल समर्पित कर रहा था। दूसरी जगह उन्होंने ये पढ़ा कि नवरात्र के ही दिनों में बंगाल में जो शराब होती है, जो नशा होता है उसकी बहुत ज़्यादा वृद्धि शुरू हो जाती है। और इसी तरह से उन्होंने दो-तीन उदाहरण और दिये थे।
तो वो यही कह रहे थे कि क्योंकि शायद आज के समय में लोगों को नवरात्रि का जो असली महत्व है वो नहीं पता है, इसलिए उनके लिए त्यौहार जो है वो पूरी तरह से मनोरंजन बन गया है और कुछ भी नहीं बचा है। तो वो चाहते थे कि आप एक बार इस विषय पर थोड़ी बात करें कि वास्तव में नवरात्रि का महत्व क्या है।
आचार्य प्रशांत: जो देवी-पूजन का सिद्धान्त है, जो ‘शाक्त पंथ’ का पूरा दर्शन ही है, उसको समझना होगा। देवी को समझ गये तो नौ देवियाँ या नवदुर्गा एकदम स्पष्ट हो जाएगी अपनेआप। जो पूरी कथा है देवी की, और साथ-ही-साथ देवी का सिद्धान्त और दर्शन भी आता है ‘दुर्गासप्तशती’ ग्रन्थ से। तो जो भी लोग देवी उपासक हैं, जिनकी भी शक्ति में आस्था है, अगर उन्होंने दुर्गासप्तशती नहीं पढ़ा है तो फिर प्राकृतिक सी बात है कि वो नवदुर्गा का दुरुपयोग करेंगे।






