आम आदमी को भले ही कम चोट लगती हो, आप धार्मिक आदमी को कहोगे, उसे खट से चोट लगती है। अभी यहाँ कोई बैठा हो बहुत धार्मिक आदमी, वह भीतर से छलनी हुआ जा रहा होगा, “क्या बोल रहे हैं! महापाप!” तुमने अनंत को इतनी छोटी चीज़ क्यों बना दिया कि कोई उसको घाव दे सके, बताओ न। आकाश पर चोट लग सकती है? मारो गोली, आकाश को लगेगी चोट? थूको आकाश पर, आकाश गंदा हो जाएगा? सत्य तो आकाश है, जिसमें घुला जा सकता है उसमें लीन हुआ जा सकता है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी।
आचार्य प्रशांत: अरे, मेरा पर्चा कहाँ है? नहीं, तो बात बराबरी की होनी चाहिए न। तुम पर्चा लाए हो, तो मैं भी कुछ।
प्रश्नकर्ता: हेलो सर। मेरा प्रश्न ब्लास्फ़ेमी या ईश-निंदा के ऊपर है। इसके प्रश्न के लिए मैं कुछ उदाहरण देना चाहूँगा, जो कि हर धर्म से हैं। जैसे, बौद्ध धर्म में श्रीलंका में एक महिला ने बुद्ध की मूर्ति के साथ फ़ोटो-शूट किया था कुछ, तो उसके बाद उसको जेल हो गई थी। इसी प्रकार से क्रिश्चियनिटी में भी एक इटली के दार्शनिक और गणितज्ञ थे, जिओर्दानो ब्रूनो। उनको भी चर्च के ख़िलाफ़ बोलने पर ज़िंदा जला दिया गया था।
इसी प्रकार मुस्लिम में भी यह काफ़ी होता है, एक आसिया बीबी करके पाकिस्तानी ईसाई महिला थीं, उनको जेल हो गई थी, फ़ाँसी की सज़ा दे दी गई थी उसके बाद। और सलमान रश्दी ने पुस्तक लिखी थी, उनके ऊपर भी फ़तवे जारी हुए, उनके ऊपर हमले हुए। चार्ली एब्दो, एक ने कार्टून बनाया था, उनके लिए भी। और फिर भारत में भी, हम जैसा देखते हैं, जैसे ओपेनहाइमर में भी कुछ ऐसे




