तुम ये माने बैठे हो कि समाज बहुत अच्छा है, क़ानून में बस कमी है। क्यों अपने आपको कैरेक्टर सर्टिफ़िकेट दे रहे हो? क्यों कह रहे हो कि इस समाज का चरित्र बहुत अच्छा है? क्यों समाज को एक चरित्र प्रमाणपत्र दे रहे हो? मत दो भाई। इस समाज को अच्छा कैरेक्टर सर्टिफ़िकेट देने की कोई ज़रूरत नहीं है। जो मामले होते हैं न, वो प्रतिनिधि मामले हैं — वे रेप्रेजेंटेटिव मामले हैं। वो ऐसा नहीं कि यूँही कोई आसमान से गिरा एलियन है जो आकर रेप कर गया। वो इसी समाज, इसी मिट्टी से उठा हुआ अपराधी है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। आचार्य जी, अभी जो कोलकाता केस हुआ है, उसके बाद देश के और राज्यों से भी ऐसी बहुत सारी ख़बरें, ऐसी बहुत सारी घटनाएँ सामने आ रही हैं और और भी आगे भी आती चलेंगी। अब ये जो अपराध है, ये जो जघन्य अपराध है, इसका हम ये तो जानते हैं कि जो वास्तविक परिवर्तन आएगा वो भीतरी होगा। जो बदलाव आ सकता है, वो भीतरी होगा।
पर बाय लॉ इस क्राइम का क्या पनिशमेंट होनी चाहिए? व्हाट इज़ द राइट पनिशमेंट इस क्राइम के लिए? बाय लॉ क्या सही पनिशमेंट होनी चाहिए?
आचार्य प्रशांत: बेटा, बाय लॉ जो पनिशमेंट होना चाहिए वो तो लॉ में पहले से ही है। प्रॉब्लम ये थोड़ी है कि लॉ में लैक्सिटी है। लॉ को कहाँ तक ले जाओगे? कुछ जगहों पर तो ये तक है कि बलात्कारी को फांसी की सज़ा दे देंगे। लॉ




