आकाश के अणु-अणु में ये बात बसी हुई है कि 'All is already and always perfect', सब कुछ सदा और सर्वथा पूर्ण है। हमें ये विचार है कि कुछ कमी है, और इस कमी को पूरा करने के लिए हम सुख की तरफ़ जाते हैं। ये मानना कि कुछ कमी है — यही कमी है। जहाँ देखा कि मान रहे हो कि कुछ कमी है, वहीं समझ लो — माया है। माया क्या है? कमी का आभास। प्रतीत होती है कि कुछ कम है, कुछ कम है। जबकि हवा में और रोशनी में, हर जगह लिखा हुआ है कि सब परफेक्ट है, पूरा है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: करप्शन (भ्रष्टाचार) कहाँ पैदा हुई? किस पॉइंट पर?
आचार्य प्रशांत: कहीं भी नहीं।
प्रश्नकर्ता: जो ये गंदगी दिखती है…
आचार्य प्रशांत: कहीं भी नहीं। कहीं कोई करप्शन नहीं है। करप्शन किसको कहना चाहते हो?
प्रश्नकर्ता: मतलब जो आसक्ति है इस चीज़ को लेकर ज़्यादा है कि.....




