प्रश्नकर्ता: ज्ञानी कौन है और अज्ञानी कौन है?
आचार्य प्रशांत: ज्ञानी वो जिसे ज्ञान है; अज्ञानी वो जिसे ये ज्ञान है कि वो अज्ञानी है। दोनों ज्ञानी हैं, अज्ञान कुछ नहीं होता।
प्र: किस चीज़ का ज्ञान?
आचार्य: चीज़ का ज्ञान। चीज़ कुछ भी हो सकती है, हर ज्ञान चीज़ का ही होता है। किसी भी चीज़ का ज्ञान हो, चीज़ कुछ होती रहे, क्या फ़र्क पड़ता है, ज्ञान के मध्य में हमेशा चीज़ें ही होती हैं, व्यक्ति, वस्तु, विचार – सब चीज़ हैं।
प्र: कुछ इससे भी परे है?
आचार्य: वो ज्ञान का विषय नहीं होता। ज्ञान में हमेशा विषय और विषई होते हैं। ज्ञान का हमेशा विषय होता है–चीज़; जहाँ विषय है और विषई है, वो द्वैत हो गया न?
परे जो है, उसकी क्या बात करें और क्या नाम लें, उसे भी द्वैत के दायरे में ला दें?
तो फिर कहें भी क्यों कि परे कुछ है!




