प्रश्नकर्ता: सर, हम हमेशा कहते हैं कि एचआईडीपी (सम्पूर्ण विकास पाठ्यक्रम) का मतलब है अपनेआप को जानना। मैंने कुछ समय पहले अपने बारे में एक बात गौर की। एक दिन मैं जब सुबह कॉलेज के लिए निकल रहा था तो गलती से अपनी घड़ी घर पर भूल गया। सर, वह दिन बहुत अच्छा गुज़रा, कंडीशनिंग (अनुकूलन) नहीं थी।
आचार्य प्रशांत: शाबाश!
प्र: अगले दिन जब मैंने घड़ी पहनी तो सुबह आठ बजे ही घड़ी पहनी और पूरे दिन का हिसाब लगा लिया कि शाम को चार बजे कॉलेज से निकलूँगा, उसके बाद जाऊँगा, सोऊँगा, ये करूँगा, वो करूँगा।
आचार्य: बहुत बढ़िया, बहुत बढ़िया।
प्र: अगले दिन फिर क्या किया कि आज हिसाब नहीं लगाऊँगा कि आज क्या करना है। लेकिन नहीं हुआ, दो बजे फिर हिसाब लगा दिया मैंने। सर, उस दिन से घड़ी नहीं पहनी। तो सर, इसका सोल्यूशन क्या है — घड़ी न पहनूँ या कंडीशनिंग न लगाऊँ?
आचार्य: तथ्य को जाँचने के लिए जो तुमने किया वह बहुत बढ़िया था। ये करने के लिए थोड़ा साहस चाहिए। आमतौर पर अगर कोई घड़ी न पहने तो वो समय जानने का कुछ और उपाय निकालेगा। वो ये तो नहीं करेगा कि एक दिन और नहीं पहनूँगा। वो पहले दिन के अपने काम को गलती मानेगा और दूसरे दिन उस गलती को ठीक करने की कोशिश करेगा। तुमने जो किया वो अच्छा किया, भला किया, बढ़िया।







