काम ज़रूरी होते हैं, रिज़ल्ट पर हमारा हक़ नहीं होता। जब फ्रस्ट्रेशन में समय बीत रहा हो, तो तुरंत याद आना चाहिए कि यार, इतना भी समय कहाँ है कि मैं उदास हो पाऊँ। और अगर मेरे पास ये समय है, तो मैं ये समय अपने असली काम से चुरा रही हूँ। काम ज़रूरी है, तो जो कुछ तुम्हारे पास है, सब दे दो न उसको। इतना थक जाओ कि फ्रस्ट्रेट होने के लिए भी एनर्जी न बचे।
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प्रश्नकर्ता: गुड इवनिंग सर। आई एम अ टीचर। कई बार क्या होता है कि आपको पता होता है कि आप लाइफ़ में बिल्कुल सेट होते हो कि मुझे ये काम करना है, नॉट जस्ट बिकॉज़ ऑफ़ सोसाइटी। आप किसी से भी अफेक्टेड नहीं होते, फैमिली से भी नहीं होते और सोसाइटी से तो आपका कोई लेना-देना ही नहीं होता। लेकिन स्टिल आप इतनी बार फेलियर को फेस करते हैं, कि हैं तो हम ह्यूमन बीइंग ही।
बाहर की सोसाइटी, फैमिली हमें भले ही अफेक्ट न करे, लेकिन हमें अपने अंदर पता होता है कि हमारी लाइफ़ में क्या चल रहा है। तो हम कई बार बहुत ड्रेन आउट फील करते हैं। जब हमें बार-बार फेलोअर मिलता है उस चीज़ में, तो हम ड्रेन आउट फील करते हैं। और नेक्स्ट डे जब आप एक बार के लिए फ्रस्ट्रेटेड हो के सोच भी लें तो यार, क्या कर रहे हैं? छोड़ो न। नेक्स्ट डे फिर वही चीज़ आपके माइंड में होती है क्योंकि आप दूसरी चीज़ पर शिफ्ट हो ही नहीं पाते। वो आपके फैक्टर से आ रही है, वो चीज़।




