प्रश्नकर्ता: नमस्ते गुरुजी! मैं एक ऐक्टर हूँ, मुम्बई में पिछले पाँच साल से काम कर रहा हूँ। और अभी पिछले कुछ सालों से अध्यात्म की तरह काफ़ी झुकाव हो रहा है। और मुझे अभी मतलब रीएलाइज़ हुआ कि मुझे दो डर लग रहे हैं, ‘एक तो अननोन की तरफ़ जाने का और दूसरा कि जो मेरा प्रोफेशन है उसकी तरफ़ मेरा झुकाव कम न हो जाए।‘
और लेकिन मैं, मतलब सच पता होने के बावजूद कि मुझे खुद के अन्दर कमियाँ दिख रही हैं कि मैं कितना झूठ बोल रहा हूँ और जो धोखा है उससे शर्म भी आती है और वो कंटिनयु(लगातार) नहीं कर सकता मैं। तो वो भी है कि चॉइस, मतलब डर भी है और ये भी है कि ऐसे भी नहीं रह, खुद से झूठ नहीं बोल सकता कंटिनयु, धोखा नहीं दे सकता।
आचार्य प्रशांत: देखिए आपने कहा कि 'अननोन की तरफ़ जाने का डर लग रहा है।' अननोन माने तो अननोन, पता ही नहीं है वहॉं क्या है? उससे डर कैसे गए? अज्ञात है न वो, अंजाना। डरने के लिए कुछ चाहिए न, जिससे डरते हो? जब आप कहते भी हो ये कि पता नहीं किससे डर लग रहा है पर बस लग रहा है तो बात इतनी सी नहीं होती है, कुछ-न-कुछ छवि होती है मन में, जिससे हम डर रहे हैं, भले ही हम खुद उस छवि के प्रति जागरूक न हों। हो सकता है हमें ही न पता हो हम किस चीज़ से डर रहे हैं, पर कुछ होता ज़रूर है क्योंकि मन का नियम है कि वो विषय के बिना, ऑब्जेक्ट के बिना काम कर ही नहीं सकता।
जैसे इंसान अगर कहीं है तो साँस भी होगी, दोनों अलग-अलग नहीं हो सकते। न तो आप ये कह सकते कि 'साँस तो चल रही थी पर वहाँ इंसान कोई नहीं था,' मामला बड़ा भूतिया हो जाएगा कि सिर्फ़ साँस हैं, इंसान नहीं है और आप ये भी नहीं कह सकते कि इंसान हैं। तो मन की सामग्री, मन का प्राण हैं विचार, छवियाँ, कल्पनाएँ, विषय। डर के पास कुछ-न-कुछ तो होगा बने रहने के लिए, जिसको वो सोचता है, पकड़ता है।
तो पहली बात तो कभी भी ये मत कहिए कि फेयर ऑफ द अननोन है, अज्ञात का भय है, नहीं, ऐसा कुछ होता नहीं। कोई भी अज्ञात से नहीं डर सकता, कुछ ज्ञात तो होगा। अब सवाल ये उठता है, क्या ज्ञात है? काहे से डर रहे हैं? क्योंकि आप ईमानदारी से मुझसे कह सकते हैं कि वाकई मैं भविष्य के बारे में तो कुछ जानता ही नहीं, कोई भी नहीं जानता भविष्य के बारे में कुछ भी। तो हम कैसे कह दें कि कुछ ज्ञात है और उससे डर लग रहा है? वाकई हमें कुछ भी ज्ञात नहीं है, यही तर्क होगा न हमारा कि भविष्य को लेकर के वाकई हमें कुछ भी ज्ञात नहीं है लेकिन डर फिर भी लग रहा है?




