दुनिया इतनी बुरी क्यों है? ईश्वर हमारे अंदर है या बाहर? || आचार्य प्रशांत (2016)

प्रश्नकर्ता: सर, ये बोला जाता है कि गॉड (भगवान) बहुत अच्छा है, वो बहुत परोपकारी है। लेकिन फिर भी ये दुनिया में इतना बुरा होता रहता है। ऐसा क्यों होता है? मेरे कहने का मतलब यह है कि अगर गॉड ये दुनिया चलाता है तो इस दुनिया में बुराई क्यों है?
आचार्य प्रशांत: ये देखने की एक दृष्टि है कि गॉड दुनिया चलता है, तो दुनिया में बुरा क्यों होता है। इस दृष्टि में आपने गॉड पर ही शक कर लिया। और एक दूसरी दृष्टि ये है कि गॉड जब इस दुनिया को चलाता है, तो जो भी हो रहा है वो बुरा नहीं हो सकता। वो दूसरी दृष्टि है।
दोनों ही दृष्टियों में तथ्य एक ही है। हम भी वही कह रहे हैं जो आप ने कहा कि गॉड दुनिया को चलाता है। आप कहते हैं, ‘गॉड दुनिया को चलाता है तो दुनिया में बुरा क्यों हो रहा है?’ हम कह रहे हैं, ‘गॉड दुनिया को चलाता है तो कुछ बुरा हो ही नहीं सकता। जो हो रहा है, वही ठीक है।’
अच्छा-बुरा आप की निर्मित्ति है। अच्छा-बुरा आपने आरोपित कर दिया है। आपके संस्कारों को जो सुहाता है, आप उसको अच्छा घोषित कर देते हो और जो आपके अहंकार को पीड़ा देता है, आप उसको बुरा घोषित कर देते हो।
ये क्या ब्रह्म स्वयं घोषित करने आता है कि ये अच्छा, ये बुरा? ये वर्गीकरण किया किसने? आप कभी मन मुताबिक़ एक चीज़ को अच्छा बोल देते हो, कभी दूसरे को अच्छा बोल देते हो। समय बदलता है, देश बदलता है, आपके अच्छे-बुरे के पैमाने बदल जाते हैं। और फिर आप निर्णय करने चलते हो उस पर कि भाई, उसकी बनायी दुनिया में इतना ग़लत क्यों हो रहा है। ‘देख तेरे इंसान की हालत, क्या हो गयी भगवान।’ ‘दुनिया बनाने वाले, काहे को दुनिया बनायी।’ नहीं, गा तो तुम ऐसे रहे हो, जैसे कितने भक्तिभाव में हो। और तथ्य ये है कि बड़ा घोर अंधकार है। देख ही नहीं रहे कि सवाल किस पर उठा रहे हो।



