डर में डूबी एक पूरी पीढ़ी - और ये है डर का इलाज || आचार्य प्रशांत (2021)

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, मैं अठारह साल का हूँ और मेरे मन में लगातार एक डर बना रहता है। यहाँ तक कि जब मैं आपकी वीडियो के अनुसार अपने डरों का सामना करने कि कोशिश करता हूँ, तो भी मैं हर बार स्वयं को असुरक्षित ही पाता हूँ। मैं एक सोशल एंग्ज़ाइटी (सामाजिक चिंता) में जी रहा हूॅं। ये मानसिक असंतुलन दूर नहीं होता। मैं इससे बाहर निकलना चाहता हूँ। कृपया मार्गदर्शन करें।
आचार्य प्रशांत: आप कह रहे हैं कि डर बहुत रहता है, सोशल एंग्ज़ाइटी रहती है और फियर (डर) बहुत ज़्यादा है। बार–बार फियर का ही पूछा है। ख़ास बात यह है कि आप अठारह साल के हैं और अठारह साल में ये…. (डर से पीड़ित हैं)!
आप भी, वास्तव में पूछो तो दूसरों की करनी का फल भुगत रहे हो। तुम्हारी ये जो पूरी पीढ़ी ही है न — एटीन (अठारह) हो, टीनएज़र (किशोर) हो। हम तो जब थे, तब जेन-एक्स ही बोल देते थे। अब तो जेन-एक्स, जेन-वाइ, जेन-जेड ये सब पीछे छूट गया। अब तो मिलेनियल्स (सहस्राब्दि) हो गये न ये लोग? अठारह का है न, तो ये क्या हुए?
ख़ैर, जो भी हो तुम, तुम्हें वास्तव में वो चीज़ दी ही नहीं गयी है जो ज़िन्दगी में पाने लायक़ है। जो पाने लायक़ होता है न, वो जब तुम्हारे पास आता है तो तुम्हें डराता नहीं है; वो तुम्हें एक ग़ज़ब विश्वास से भर देता है। और जब तुम्हारी पूरी पीढ़ी को ही ऐसी चीज़ें दे दी गयी हैं जो ज़िन्दगी में होनी ही नहीं चाहिए, तो ज़िन्दगी ऐसी चीज़ों से भर जाती है जो तुम्हें बिलकुल डराकर, दबाकर रखती हैं।
सोशल एंग्ज़ाइटी कह रहे हो। सोशल एंग्ज़ाइटी बेटा, इसलिए है क्योंकि तुम्हारे पास जो है वो बस सोशल-ही-सोशल है। सोशल मीडिया है,



