दुनिया में किसी देश में उतनी खराब जलवायु नहीं है, जितनी भारत में है, और भारत में कहीं भी उतनी खराब नहीं, जितनी दिल्ली में है। यहाँ साँस नहीं ली जाती, यहाँ का पानी गंदा है, लेड, मर्करी सब मिले हुए हैं पानी में। जीना मुश्किल होने वाला है सबका, बस कुछ पर असर आज ही पड़ जाएगा, कुछ पर चार साल बाद पड़ेगा। जब तक आपको पता चलेगा कि यह असर इर्रिवर्सिबल है, तब तक बहुत देर हो चुकी होगी, आप कुछ नहीं कर पाओगे।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, अभी भारत की जो स्थिति है लद्दाख को लेकर, उसके बारे में मैंने कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं; पहले मैं वो सुनाना चाहती हूँ आपको, और फिर उसी से रिलेटेड मेरा क्वेश्चन भी है।
आगे को तुम पछताओगे तुम कैसे बच पाओगे सिर पर ही जब तुम वार करोगे पूरे देह का कैसे संचार करोगे मस्तक को ही जब ध्वस्त करोगे खून की नदियों से त्रस्त रहोगे ऐसा कि तैर न पाओगे।
इससे रिलेटेड मेरा प्रश्न ये है, कि भारत की ऐसी परिस्थितियाँ देखकर मैं बहुत ज़्यादा विचलित हो जाती हूँ, आचार्य जी। और अपने विचारों में खो जाती हूँ, बिल्कुल पढ़ाई वग़ैरह में मन नहीं लगता। तो आप ज़्यादा इन चीज़ों को देख पा रहे हैं, इन चीज़ों को फेस कर रहे हैं। तो मेरा प्रश्न उसी से है और मैं जो हूँ उससे बिल्कुल खो जाती हूँ विचारों में, तो मैं ऐसी कौन-सी गलती कर रही हूँ? और आप ऐसा क्या अलग करते हैं जिससे आप अपना काम कर रहे हैं पर मैं नहीं कर पाती?
आचार्य प्रशांत: तो क्या करें, और क्या करें?




