प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, भय, निर्भय और अभयㄧइनमें भेद क्या है?
आचार्य प्रशांत: आप अपनी हालत बताओ। यहाँ पहाड़ पर तीन तरह के पेड़ होते हैं, एक पेड़ का नाम है भय, एक का नाम है निर्भय, एक का नाम है अभय। मैं देने लगूँ जानकारी, तुम्हें क्या मिलेगा? तीन तरह की घाँस भी है, तीन तरह के बादल भी हैं, तीन तरह के ही छोटे-छोटे कीड़े उड़ रहे हैं, ये भी हैं। ये सब तो सामान्य ज्ञान है, इकठ्ठा कर के क्या करोगे? अपनी बात करो न।
प्र: अपनी बात बता रहा हूँ आचार्य जी, खेल के मैदान पर जाता हूँ तो फिर दिक्कत हो जाती है, भय बहुत लगता है। फिर अब अभय को पाना चाहते हैं तो कैसे पाएँ? कहीं भी जाता हूँ, कुछ भी काम करता हूँ तो भय लगता है, तो मैं उस भय को हटाना चाहता हूँ बिलकुल, कैसे हटाऊँ?
आचार्य: भय क्या कहता है?
प्र: कुछ खोने का भय होता है, बस डर लगता है।
आचार्य: जो कुछ भी लगता है इसका विवरण दो ज़रा।
प्र: मैं जूडो का खिलाडी हूँ और मुझे बीस साल हो गए खेलते-खेलते, लेकिन जब भी प्रतिस्पर्धाओं में जाता हूँ तो हार-जीत का भय लगता है।




