जबकि ये जानी-समझी बात है कि स्मृति में जो कुछ लिखा है, उसे श्रुति-सम्मत होना चाहिए, और स्मृति अगर श्रुति का उल्लंघन कर रही है तो स्मृति को हटा दो, श्रुति की बात मानी जाएगी, क्योंकि श्रुति वो देती है जो कालातीत सत्य है। और स्मृति वो बातें कहती है जो उस समय के समाज में प्रचलित हैं। उस समय समाज में जो प्रचलित है, उन चीज़ों को माध्यम बनाकर, सहारा बनाकर, उन चीज़ों को भी सम्मान देकर किसी तरह से धर्म को अशिक्षित लोगों तक भी पहुँचा सको, इसके लिए स्मृति थी।
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प्रश्नकर्ता: मेरा नाम सूरज है। वेस्ट बंगाल के दुर्गापुर में अभी एक घटना हुई है, उससे संबंधित सवाल है मेरा। वहाँ मेरे पिताजी का घर है और वहाँ पर दुर्गापुर में अभी एक छात्रा के साथ एक गैंगरेप की घटना सामने आई है और उस घटना में पुलिस रिपोर्ट के अनुसार आरोपी जो है, वो कथित तौर पर उनका मित्र या जानकार था। सवाल ये है कि जो पीड़िता हैं, उनके जो जानकार हैं उनके साथ इस तरह की घटना हो रही है, तो ये हमारे समाज में इस तरह के रिश्तों के बारे में क्या बताता है? हमारे रिश्तों का स्तर अब क्या हो चुका है? और दूसरा सवाल ये है कि सरकार इस बारे में क्या कर सकती है।
आचार्य प्रशांत: रिश्तों के बारे में?
प्रश्नकर्ता: इस तरह की घटनाओं के बारे में?
आचार्य प्रशांत: पूरी जो बात है न, उसको पहले अपने तल पर अच्छे से समझा करिए, ठीक है? और फिर जहाँ तक आप ख़ुद ही पहुँच जाएँ, वहाँ पहले पहुँच जाइए और फिर आप मेरे पास लेकर के आइए, है न। तो उसमें मैं आसानी से फिर आपको समझा पाऊँ।




