प्रश्न: ‘भगवान’ क्या हैं?
वक्ता: इसका जवाब देना बहुत आसान हो जाता अगर तुमको वाकई पता ही ना होता, अगर पहले ये शब्द कभी सुन ही न रखा होता। अगर कोई बिल्कुल साफ़ स्लेट के साथ ये सवाल पूछे, ‘भगवान का क्या मतलब है?’ तो इसका जवाब देना मुश्किल नहीं होता। एकदम आसान है| पर जितने भी लोग यहाँ बैठे हैं उसमें से कोई नहीं है जिसने ‘भगवान’ शब्द सुन नहीं रखा? हम सबके मन भगवान शब्द की छवियों से, कहानियों से अतिभारित हैं| तो इसलिए भगवान क्या है यह कहना तो दूर की बात है, पहले तो यह देखना ज़रूरी है कि भगवान क्या नहीं है। एक कमरे में बहुत सारी गन्दगी भरी हो और तुम्हें कुछ और रखना है, तो पहले क्या करना पड़ेगा?
सभी श्रोतागण( एक स्वर में): सफाई।
वक्ता: पहले साफ़ करोगे, या ये करोगे कि दरवाज़ा खोलोगे और जो सामान है उसे अन्दर ले आओगे? भगवान को लेकर के हमने इतनी सारी छवियाँ बना रखी हैं न कि कहानियां चलती रहती हैं| क्या कहानियां हैं भगवान को लेकर के बताओ?
श्रोता १: कुछ मूर्ति में देखते हैं, कुछ इंसानों में देखते हैं, मंदिर में रहता है, धार्मिक ग्रंथो में, बड़ा ताकतवर है, स्वर्ग-नर्क का खेल रचाता है, जो पापी होते हैं उनको दंड मिलता है, बढ़िया वालों को स्वर्ग में मिठाइयाँ बटती हैं, प्रेमपूर्ण है, जब गुस्सा करता है तो दंड देता है।




