दो चीज़ें होती हैं, जिसमें इंसान फँसता है। एक — बहुत बड़ा मकान, और दूसरा — लाखों-करोड़ों की शादी, जिसमें विलासिता का प्रदर्शन करना अनिवार्य है। इन दोनों के लिए बहुत पैसा चाहिए, जिसकी ख़ातिर आप ज़िंदगी भर ग़ुलामी करते हो। अध्यात्म इन मोटे खर्चों से बचने का नाम है। अगर ये मोटे खर्चे न हों, तो आप जितना कमाते हो, ज़िंदगी उससे आधे में भी चल जाए, क्योंकि वे खर्चे जो ज़िंदगी को बिल्कुल मस्त और आनंदमय बनाते हैं, वो बहुत बड़े नहीं होते।
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प्रश्नकर्ता: सर, मेरे पेरेंटस(माता-पिता) फ्यूचर को लेकर डराते हैं कि अभी यू आर थिंकिंग लाइक दैट, व्हेन यू विल बी ऐज़ ओल्ड ऐज़ अस, यू विल रिग्रेट, यू विल बी डिप्रेस्ड, यू विल बी अलोन(मेरे अभिभावक भविष्य को लेकर डराते हैं कि अभी तुम ऐसा सोचती हो पर जब तुम हमारी उम्र की हो जाओगी, तब तुम पछताओगी, तुम अवसादग्रस्त हो जाओगी, तुम अकेली हो जाओगी)।
आचार्य प्रशांत: आप कितने साल के हो?
प्रश्नकर्ता: आई एम थर्टी(मैं तीस साल की हूँ)।
आचार्य प्रशांत: ओल्ड(बूढ़ा) माने क्या होता है?
प्रश्नकर्ता:




