पूरी दुनिया की ओर देखिए सब सेटल्ड-ही-सेटल्ड लोग दिखाई दे रहे हैं। दिल-ही-दिल में हर सेटल आदमी जानता है कि वो ग़लत जगह सेटल हो गया है। जहाँ रुकना नहीं चाहिए वहाँ रुक गया है। अगर अभिभावकों को यह नहीं पता कि उन्होंने जीवन में क्या-क्या ग़लत करा है, तो उन्होंने जो कुछ करा है वही वो अपने बच्चों तक भी पहुँचा देंगे। बच्चे हमारे शब्दों से बहुत कम सीखेंगे, वो हमारे जीवन से सीख लेते हैं। आपका जीवन अगर आज़ादी भरा है, हिम्मत भरा है, तो बच्चों को सीख मिल गई आपसे।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: मेरे पास पूछने के लिए एक उचित प्रश्न नहीं है। मूल रूप से मुझे कुछ मार्गदर्शन की आवश्यकता थी। बच्चों के साथ कैसे व्यवहार करें, ताकि वे अच्छे नागरिक बनें, अच्छे इंसान बनें, अपने जीवन में सेटल (स्थिरता) हो पाएँ ? बच्चों के समूचे विकास हेतु मैं आपसे मार्गदर्शन चाहता था। कृपया इस विषय पर प्रकाश डाल सकते हैं?
आचार्य प्रशांत: आप तो मुझसे वही सब कुछ करने का तरीका पूछ रहे हैं जो नहीं करना चाहिए। हिंदुस्तान के और दुनिया भर के भी, पर विशेषकर हिंदुस्तान के हर माँ-बाप की यही ख़्वाहिश रहती है कि घर में उनको ऐसी परवरिश दी जाए कि वो ठीक-ठाक बड़े हो जाएँ और फिर सेटल हो जाएँ। आप जिनसे यह प्रश्न पूछ रहे हैं, वही आज तक सेटल नहीं हुए, वो कैसे बताएँ बच्चों को सेटल करने का तरीका?
प्रश्न में बड़ा भरोसा है अपने ऊपर, “मैं तो ठीक हूँ, मैं बच्चों का क्या करूँ, यह बता दीजिए आचार्य जी, थोड़ी-सी गाइडेंस दे दीजिए। मैं तो ठीक ही हूँ।” आप कह रहे हैं, “घर में क्या माहौल रखें कि बच्चों की बढ़िया परवरिश हो?” घर का माहौल कौन रखेगा? आप रखेंगे। घर का माहौल वैसा ही तो होगा जैसे आप हैं। तो जैसे आप हैं वैसा घर का माहौल हो जाएगा। जैसे घर का माहौल हो जाएगा वैसे बच्चे हो जाएँगे।




