डेटिंग ऐप, कुंडली मिलान और “मेरी पसंद” जैसी धारणाएँ अक्सर प्रेम नहीं, बल्कि डर, सामाजिक कंडीशनिंग और अहंकार से संचालित होती हैं। परंपरा के दबाव में किया गया चुनाव और केवल व्यक्तिगत पसंद पर आधारित चुनाव, दोनों ही भ्रमित हो सकते हैं। सच्चा प्रेम तब संभव होता है जब व्यक्ति स्वयं को जाने और ऐसा संबंध चुने जो उसके बंधनों, भय और अहंकार को चुनौती देकर उसे भीतर से मुक्त करे।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मेरा नाम आशना है और मेरा जो सवाल है, वह डेटिंग ऐप से रिलेटेड है। अभी एक डेटिंग ऐप एक फीचर लेकर आया है जिसमें राशि के थ्रू आप अपना पार्टनर चुन सकते हैं। तो मेरा सवाल यह है कि हमें डेटिंग ऐप की ज़रूरत ही क्यों है? और साथ ही साथ, जब हम आमने-सामने ही सहजता से बात नहीं कर पाते हैं, तो फिर डेटिंग ऐप पर पीछे से छुप-छुपकर बात क्यों करते हैं? आपने हमेशा समझाया है कि प्यार जो है, सच्चा प्रेम जो है, उसकी बुनियाद जो है, वह सच्चाई होती है। तो फिर ये कुंडली वग़ैरह मिलाना, इसके पीछे क्या मनोविज्ञान है? क्या हम सचमुच सच्चा प्यार ढूँढ़ रहे हैं या मतलब हमारे फ़ैसलों का दोष किसी और पर डालने का ये बहाना है एक?
आचार्य प्रशांत: ये राशि कौन है? मुझे नहीं मालूम, आपकी दुनिया है बहुत अजीब है। सवाल सुनकर थोड़ी देर के लिए तो मैं सकते में आ जाता हूँ कि जवाब शुरू कहाँ से करूँ। कहते हैं, प्यार में कोई तीसरा बीच में नहीं आना चाहिए। आपका कुछ नाम है, आपका नाम है आशना। ठीक है उसका नाम है राहुल। ये बीच में राशि कौन आ गई? क्या आशना राशि को बर्दाश्त करेगी? क्या करना चाहिए?
श्रोता:




