ऑब्ज़रवेशन का हमेशा एक ऑब्जेक्ट होता है। अटेंशन थोड़ी-सी अलग चीज़ है, क्योंकि उसका कोई ऑब्जेक्ट नहीं होता। इट्स जस्ट अ स्टेट ऑफ माइंड, इन विच द माइंड नोज़, इन विच द माइंड इज़ फ़्री ऑफ डिस्टरबेंस इन व्हाटएवर इट डज़। इट डज़ नॉट हैव एन ऑब्जेक्ट ऑर अ सेंटर।
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प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, शुरुआत से ही दो शब्द बहुत इस्तेमाल हो रहे हैं यहाँ पर अटेंशन एंड ऑब्ज़रवेशन। ख़ुद पर ग़ौर करने का मतलब ये है कि ख़ुद को देखना। लेकिन आचार्य जी, सिर्फ़ देख लेने से से क्या हो जाएगा? देखने का मतलब क्या है?
आचार्य प्रशांत: तो दो बातें हैं: पहला देखने का मतलब क्या है, और दूसरा देखने से होता क्या है, हो क्या जाएगा? पहली बात, अटेंशन का, ऑब्ज़रवेशन का मतलब क्या है? दूसरी बात, ये हो भी गया तो इससे होता क्या है? हो क्या जाएगा?
मतलब कुछ ख़ास इनका है नहीं, दोनों ही जो शब्द हैं ये बड़े सीधे-साधे हैं, दिक़्क़त क्या आ जाती है कि हमने ये शब्द पहले से सुन रखे हैं। हैं तो दोनों ही शब्द डिक्शनरी से ही न। तो हमने अटेंशन शब्द भी पहले से सुन रखा है और ऑब्ज़रवेशन भी सुन रखा है। तो जो पहले से पता है मीनिंग, वो इसमें बीच-बीच में आकर के मिलना शुरू कर देता है। तो उसकी वजह से थोड़ा-सा कन्फ़्यूज़न होना लाज़िमी है, कोई बड़ी बात नहीं, ठीक है।
ऑब्ज़रवेशन बिल्कुल वही है, जो तुम जानते हो।




