और इन मूर्खों को हम आदर्श मानते आए हैं? || आचार्य प्रशांत (2023)

आचार्य प्रशांत: जिसमें वो दिखाई दे जाए जो सच हो। जिसमें सच्चाई दिखाई दे जाए उसको आदर्श बनाइए। जो व्यक्ति आपको सत्य दिखा दे उसको आदर्श बनाइए। इंसान अगर सत्य दिखा दे तो आदर्श कहलाने लायक़ है।
प्रश्नकर्ता: लेकिन अभी हम अगर देखें तो जो भी आदर्श माने जाते हैं वो तो बिलकुल सपने में ही जीते हैं और सपने में ही जीने की प्रेरणा भी देते हैं लोगों को। और आज ही बात हुई कि जो कामना में जी रहा है वो सपने में ही जी रहा है।
आचार्य: तो अब ये आपकी दुनिया, आपका समाज आपने जो कर रखा हो मैं थोड़े ही ज़िम्मेदार हूँ। आप किसको आदर्श बना लो। मेरे तो नहीं हैं ये सब आदर्श। आपने बना रखा है आप जानिए। आप उनको आइडियल्स बोलते हो, इन्फ्लुएंसर बोलते हो, रोल मॉडल बोलते हो, लीडर्स बोलते हो तो अब ये आपकी दुनिया है, आप किसी के पीछे-पीछे चल दीजिए उसमें हम क्या कर सकते हैं?
गधे के पीछे हो सकता है पूरी एक भीड़ चली जा रही हो उसमें हम क्या करें? इतने दिनों से तो बोल रहा हूँ न जाने कितनी किताबों में हमारे ये अध्याय आया होगा कि ग़ौर से देखो किसको आदर्श बना लिया है। कितनी ही बार आयी होगी ये बात। ये तुम्हारी पूरी ज़िन्दगी बर्बाद हो जाती है जब तुम अपना आदर्श ग़लत चुन लेते हो। और जो इस समय एकदम घटिया और गिरे हुए लोग होते हैं तुम उन्हीं को आदर्श बना लेते हो।
जो आपकी कामनाएँ हैं वो आप जिसको पाते हो कि वो पूरी कर रहा है अपनी ज़िन्दगी में उसको आप आदर्श घोषित कर देते हो। उदाहरण के लिए, आपकी कामना है, ‘मैं खूब पैसा उड़ाऊँ।‘ आप जिसको पाते हो कि वो पैसा उड़ा भी रहा है और पैसा उड़ाने का भौंडा, अश्लील प्रदर्शन भी कर रहा है वो तुरन्त आपका आदर्श हो जाता है। तो इसलिए तो लोग पैसा सिर्फ़ उड़ाते नहीं हैं, जितना उड़ाते हैं उससे भी ज़्यादा दिखाते हैं कि देखो उड़ा रहे हैं। वो आपकी कामना को अपील कर रहे हैं। वो आपकी कामना से बात कर रहे हैं, कह रहे हैं कि तुम यही करना चाहते थे न हमेशा? नोट उड़ाने हैं यही तुम्हारी कामना थी न?’



