असली आत्मविश्वास क्या है? जीवन में शांत सहज कॉन्फ़िडेंस कैसे लाएँ? || आचार्य प्रशांत (2023)

प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी। आत्मविश्वास के असली और नकली अर्थ क्या हैं? क्या आत्मविश्वास बस मान्यता मात्र है? क्योंकि इसमें 'आत्म' शब्द भी जुड़ा हुआ है, तो थोड़ा स्पष्ट करें।
आचार्य प्रशांत: जो साधारण आत्मविश्वास होता है वो एक आग्रह होता है, वो आग्रह होता है कि मुझे जो पता है वही सही है। मुझे जो पता है वही सही है, ये आग्रह आत्मविश्वास है, 'मैं इस बात पर अड़ना चाहता हूँ कि मुझे जो पता है वो सही है।' जो वास्तविक आत्मविश्वास होता है वो है आत्मा पर विश्वास। और आत्मा माने सत्य, तो वो सत्य पर दृढ़ता है। वो कहता है, ‘जो सत्य है वही सही है।’
साधारण आत्मविश्वास क्या बोलता है? ‘जो पता है वही सही है।’ वास्तविक आत्मविश्वास क्या बोलता है? 'जो सत्य है वही सही है, चाहे वो मुझे पता हो चाहे न पता हो।' साधारण आत्मविश्वास में डर बहुत है। क्या डर है? ‘आग्रह करो कि मुझे जो पता है वही सही है, अगर वो बात ग़लत निकल गयी तो मैं टूट जाऊँगा।' वास्तविक आत्मविश्वास कहता है, ‘जो भी सही है, सामने आने दो, मैं नहीं टूटने का।’
वास्तविक आत्मविश्वास मात्र निष्कामना से आ सकता है। जो भी पता है, सामने आने दो, मुझे उससे कोई अच्छा परिणाम चाहिए ही नहीं तो मैं क्यों निराश होऊँगा! मेरी आशा क्यों टूटेगी!
समझ पा रहे हैं या फँस रही हैं बात?
वास्तविक आत्मविश्वास कोई आग्रह लेकर आता ही नहीं है। वो कोई चीज़ होता ही नहीं है, वो खुलापन और एक खालीपन होता है। जो सच है वो पता लग जाए, हमने पहले से कोई आग्रह कर ही नहीं रखा कि सच इस तरह का हो, कि सच उस तरह का हो, कि सच वैसा हो, कि सच हमारी मान्यता और सुरक्षा के अनुकूल हो, ऐसा हमने कुछ शर्त बाँधा ही नहीं। जो भी सच्चाई है साहब, सामने आये, अंजाम क्या होगा हमें परवाह नहीं — ये निष्कामना है।



