आचार्य प्रशांत: आप जो चाहो, जिसको चाहो, दिखा सकते हो, कैमरे का मतलब ही होता है झूठ। कैमरे का तो मतलब ही झूठ है।
प्रश्नकर्ता: और ये सब कंटेंट (सामग्री) बनाया भी जा रहा है, फ़्रीडम ऑफ़ स्पीच (अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता)। वो बोल रहे हैं कि ये फ़िल्म बनाना हमारी फ़्रीडम ऑफ़ स्पीच है।
आचार्य: तो वो बात ठीक है लेकिन फ़्रीडम और इक्वालिटी (समानता) फिर एकसाथ चलेंगे न। हम कॉन्स्टीट्यूशन (संविधान) को ही ले लें जहाँ पर फ़्रीडम की बात होती है, वहाँ इक्वालिटी ऑफ़ ऑपर्चुनिटि (बराबरी का अवसर) की भी बात होती है, ठीक है? फ्रेंच रिवॉल्यूशन में तो लिबर्टी (स्वतन्त्रता) और फिर आता है इक्वालिटी, फिर आता है फेर्टर्निटि (पितृत्व), तो लिबर्टी और इक्वालिटी साथ-साथ चलते हैं।
तो वहाँ फ़्रीडम है ये मूवी बनाने की, और मुझे भी फ़्रीडम है इस मूवी पर कुछ बोलने की, बट डू वी हैव ईक्वल ऑपर्चुनिटि टू मेक आरसेल्वस् हर्ड (लेकिन क्या हमारे पास बराबर का अधिकार है सुने जाने का)?
प्र: हाँ।




