एक बार को ज़िंदगी में चोर आ रहा हो, लुटेरा आ रहा हो, भ्रष्टाचारी आ रहा हो तो मजबूरी में उसको स्वीकार कर लेना, हालत ऐसी बने तो। पर ज़िंदगी में अगर अंधविश्वासी आ रहा हो, पलटकर भागना। आपने कभी सोचा ये डर क्या है? ये अहंकार है, ये अज्ञान है जो मानता ही नहीं कि तुम पूरे तरीके से कंडीशन्ड (संस्कारित) हो।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मेरा सबसे करीबी मित्र था। उसकी उम्र २८ साल थी, वो अभी एक हॉस्पिटल में डॉक्टर था। उसको रात में सोते समय कार्डियक अरेस्ट आया और उसकी मृत्यु हो गई। वहाँ जाकर पता चला तो उसने कोई स्पिरिचुअल एक्सपीरियंस (आध्यात्मिक अनुभव) देने वाले ड्रग्स (नशीली दवा) का सेवन किया था और अब वो नहीं रहा। हम दोनों आचार्य जी सैनिक स्कूल रीवा मध्य प्रदेश से साथ में पढ़ाई किए, फिर कोटा में तैयारी करने के बाद वो एमबीबीएस करके डॉक्टर बना और मैं भी आईआईटी बीएचयू से पीएचडी कर रहा हूँ। हम दोनों को शुरू से आध्यात्मिक मार्ग में चलना है ऐसा हम लोग सोचते थे और यही सब पढ़ते और डिस्कस (चर्चा) करते थे।
और इसी में खोजते-खोजते कोई किताब मिली उसको जिसमें ये सब बताया गया था कि ब्रेन (मस्तिष्क) के अलग-अलग सेक्शन होते हैं जिसमें वो खुलते हैं तो इनलाइटेनमेंट होता है और उसमें कंपेयर (तुलना) करके भी बताया गया था कि हठयोग में पाँच एक्स की स्पीड रहती है, ज्ञान योग में दस एक्स की स्पीड रहती है, भक्तियोग में पंद्रह एक्स की स्पीड रहती है।
और जो इस बुक में योग बताया जा रहा है इसमें मैक्सिमम स्पीड है एनलाइटेनमेंट के लिए। इस वजह से उसका विश्वास और बढ़ गया और आजकल यूट्यूब और सोशल मीडिया पर ऐसे बहुत सारे पॉडकास्टर, इनफ्लुएंसर और गुरु भी हैं जो ऐसे स्पिरिचुअल एक्सपीरियंस




