बस अनंत प्रेम है आपसे इसलिए कुछ लिखा है। और सिर्फ़ दो-तीन पंक्तियाँ ही हैं।
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श्रोता: प्रणाम आचार्य जी। सभी बातों के प्रश्न, सभी जवाब मौजूद ही हैं। बस अनंत प्रेम है आपसे इसलिए कुछ लिखा है। और सिर्फ़ दो-तीन पंक्तियाँ ही हैं।
बुद्धि में ज्ञान की चमकीली धार आपने दी। लोकधर्म, जिसकी आज ज्यादातर बात ही हुई है। लोक धर्म को काटने और इसे संवारने की, ताक़त बेशुमार आपने दी। निराश हो निर्मम बनो ताप रहित बस युद्ध हो, युद्धस्व की ये शिक्षा आपने दी। कहानियाँ और वेदों के पीछे छिपे, प्रतीकों की सच्ची समझ आपने दी। आत्मा को विवेक पूर्वक मुझ अहंकार ने स्वामी बनाया, ऐसी क्षमता अपार आपने दी। आपने कबीर जी को साहब कहा है, और मेरे लिए आप साहब हैं।
धन्यवाद।
श्रोता: प्रणाम आचार्य जी। मैं अन्नपूर्णा मेरा नाम है। मैं भोपाल से हूँ। बेसिक मैं सतना जिले से हूँ और मायका मेरा शहडोल जिले से है। आचार्य जी आपको मैं सामने से देख पा रही हूँ, मेरे लिए सपने जैसा है। मैंने सोचा नहीं था कि मैं अपने जीवन में सामने से देख पाऊँगी। मेरे मन में था कि मैं हो सकता है दिल्ली आऊँगी, पूरी कोशिश। पर आपका बहुत-बहुत धन्यवाद और पूरी टीम का बहुत-बहुत धन्यवाद करना चाहूँगी, जिन्होंने ये कार्यक्रम भोपाल में आयोजित किया और मेरी एक बहन है जो शहडोल जिले से आई है। पूरा सफर करके सिर्फ़ आपको सामने से सुनने के लिए सर। मैं उसे भी मिलवाना चाहती हूँ।




