शरीर ने कहा कि अकेलापन है, अकेलापन है, तो जाकर के किसी को भी दोस्त बना लिया। कोई भी मिला, संयोग से कोई पड़ोसी मिल गया, उसी से दोस्ती कर ली, कि हाँ भाई गप्प हाँक रहे हैं, या शरीर ने कहा स्त्री चाहिए तो जाकर के वैश्यावृत्ति कर आये, कि स्त्री ही तो चाहिए। पर क्या ये संगति हमें उच्चतम की ओर ले जाती है? अच्छी किताबें , फिल्में , स्पोर्ट्स- इनकी संगति भी तो अकेलापन दूर करती है| फिर इनकी संगती क्यूँ नहीं?
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, आपने इस बारे में कहा था कि तुम्हारी कामनाएँ झूठ हैं, वो बाहर से आती हैं। थोड़े-बहुत आपने उदाहरण दिये थे, जैसे कि तुम्हें किसने बताया कि शादी कर लेनी चाहिए। मैनें इसमें अपना जोड़ दिया क्योंकि मेरे जीवन में अकेलापन ज़्यादा है, तो तुम्हें किसने बता दिया कि यार-दोस्तों के साथ मौज-मस्ती मार लो तो अकेलापन दूर हो जाएगा।
तो ये सारी कामनाएँ बाहर से ही आ रही हैं, तो मेरा इसमें प्रश्न यह था कि कुछ-कुछ चीज़ें हैं जो बाहर से आती हैं और कुछ; जैसे हमारा आकर्षण किसी फीमेल (स्त्री) की तरफ़ बढ़ रहा है, वो बायोलॉजिकल (जैविक) है, उसको भी यह बोल देंगे कि हमारी नहीं है, वो बायोलॉजी (जीवविज्ञान) से आ रही है।
लेकिन कुछ-कुछ चीज़ें हैं जो मुझे लगता है कि जो मुझे अगर किसी ने बतायी भी न होती, जैसे अकेलापन, जो मुझे अपने जीवन में सबसे ज्यादा इस वक़्त लगता है, मुझे कोई बोले भी न तो मुझे लगता है कि अन्दर से ही आ रहा है। वो तभी दूर हो पाता है जब मैं अपनेआप को किसी काम में लगाता हूँ, तभी दूर होता है। तो आचार्य जी ऐसी बहुत सारी चीज़ें होंगी जो शायद कोई बताये भी न, और जो बायोलॉजिकल कंडिशनिंग से भी न आये, तो इसका क्या समाधान है? आपकी मैं बहुत सारी वीडियो देख चुका हूँ, और मुझे पता है कि आप यह भी बताएँगे कि अपनेआप को सही काम में झोंक दो ताकि ये सारी चीज़ें न आयें, तो असली सोल्यूशन




