ऐसी शिक्षा चाहिए इंसान को || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव ऋषिकेश में (2021)

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी। मैं तेईस वर्षीय हूँ। मेरा नाम शैलेश है। मेरा सवाल एज्यूकेशन सेक्टर (शिक्षा के क्षेत्र) से रिलेटेड (सम्बन्धित) है। मेरे पहले के दो स्टार्टअप्स एज्यूकेशन में ही थे। उस दौरान मैंने स्पेसिफिकली (खासतौर पर) तीन से पन्द्रह साल के बच्चों के एज्यूकेशन सिस्टम (शिक्षा व्यवस्था) को ऑब्जर्व (निरीक्षण) किया। तो उसमें जो प्रचलित बोर्डस् हैं, जैसे आईसीएसई, सीबीएसई और फिर जो इन्टरनेशनल (अन्तर्राष्ट्रीय) बोर्डस् भी हैं, उनका आधार ही था कैपिटलिज़्म (पून्जीवाद) और कन्ज़्यूमरिज़्म (उपभोक्तावाद)। उसमें आध्यात्मिक मूल्यों की ज़्यादा कुछ गहराई की बात नहीं की जाती है। और ऑन द अदर साइड (दूसरी तरफ़) कुछ आश्रम हैं जैसे अद्वैत आश्रम और अर्श गुरूकुलम जो महाऋषियों के हैं, उसमें बहुत ही गहरे अध्यात्मिक मूल्यों की बात की जाती है।पर उनकी दो समस्याएँ हैं। उनके पास इतनी फन्डिंग (संसाधन) नहीं है कि बहुत लोगों तक पहुँचे और प्रचलित कैपिटलिज़्म या कन्ज़्यूमरिज़्म की शिक्षा उसमें बहुत ज़्यादा दी नहीं जाती है।
पिछले डेढ़ साल से मैं आपको सुन रहा हूँ। मैंने अपनी कम्पनी भी बन्द कर दी जो कि शिक्षा पर ही आधारित थी। क्योंकि मुझे लगा कि वो गलत आधारों पर बेस्ड (आधारित) है। मैं समझने की कोशिश कर रहा हूँ कि व्हॉट डज़ रियल एज्यूकेशन मीन्स (वास्तविक शिक्षा का क्या अर्थ क्या है)। तो आपसे मैं जानना चाहता हूँ कि एज़ एन ऑन्त्रप्रिन्योर, एज़ ए ब्यूरोक्रेट, पॉलिसी-मेकर, एज़ ए गवर्मेन्ट, हाउ शुड वन थिन्क अबाउट ओपनिंग अ स्कूल और स्टारटिंग आउट अ न्यू बोर्ड विच इस डिफरेन्ट एन्ड व्हिच इनकैपस्यूलेटस् बोथ द वैल्यूज़ ऑफ टेक्नोलॉजी एन्ड अपकमिंग कन्ज़्यूमरिज़्म एंड कैपिटलिज़्म बट हैज़ कोर ऑफ वैदान्तिक वैल्यूज़ एन्ड अध्यात्म विदिन इट? ( एक उद्यमी होने के नाते, एक अफ़सर, नीति-निर्धारक, एक सरकार के तौर एक ऐसे नये स्कूल या बोर्ड को खोलने के बारे में कैसे सोचना चाहिए जिसमें नयी पीढ़ी के पून्जीवाद और उपभोक्तावाद के मूल्य भले ही हों लेकिन उसका केन्द्र वेदान्तिक और आध्यात्मिक मूल्यों से निर्मित हो?)



