प्लेन के लिए सबसे नाज़ुक क्षण होता है, जब वो टेकऑफ़ कर रहा होता है। उसके बाद भी हम वहाँ पर हॉस्पिटल जैसी सेंसिटिव चीज़ बना रहे हैं — फिर तो राम ही मालिक है। ये अद्भुत बात भारत में ही पाई जा सकती है — कि ये रहा एयरपोर्ट, और एयरपोर्ट के बिल्कुल बगल में बिल्डिंग है, और कोई सवाल भी नहीं उठाता। जब तक हम समझेंगे नहीं कि गरिमा के साथ जीना ज़्यादा ज़रूरी है, तब तक हम अपनी सुरक्षा, अपना आत्मसम्मान — सब बेचना गवारा करते रहेंगे।
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प्रश्नकर्ता: सर, जहाँ दुर्घटना हुआ, एयरपोर्ट के बगल में हॉस्पिटल क्यों था? ऐसा अलाउड है? या अगर हॉस्पिटल नहीं होता तो...?
आचार्य प्रशांत: इतना अच्छा है सवाल, लेकिन हम ऐसे फंडामेंटल क्वेश्चंस पूछते नहीं हैं ना। हम बहुत सारी बातों पर चर्चा करेंगे कि ड्यूल इंजन फेल्योर क्यों हो गया, कॉन्सपिरेसी थ्योरीज़ की बात करेंगे — लेकिन एक बहुत छोटा सा और बड़ा सीधा सवाल है, वो हम नहीं पूछेंगे कि एयरपोर्ट के बगल में हॉस्पिटल है ही क्यों?
दुनिया के किसी भी देश में, भारत में भी, ये अलाउड ही नहीं होता कि एयरपोर्ट की जो बाउंड्री वॉल है, वहाँ से एक हॉस्पिटल शुरू हो जाता हो। हॉस्पिटल को जो रिस्क हैं एयरपोर्ट के बगल में होने के, तो बहुत ज़ाहिर — एकदम ऑब्वियस बात है ना।




