आत्मा, परमात्मा और जीवात्मा - इनका अंतर साफ़ समझिए || आचार्य प्रशांत (2023)

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम। एक छोटी सी कन्फ़्यूज़न थी कि अब तक मैं समझता था कि जिसको हम लोग जीवात्मा कह रहे थे वो आत्मा है। और जिसको हम आत्मा कह रहे थे वो परमात्मा है, जिसे हम सत्य कहते थे। ये मेरी अपनी समझ थी।
तो मुझे अभी तक ऐसा लगता था कि जो जीवात्मा है, वो वास्तव में परमात्मा या उस सत्य का अंश ही है। इसी वजह से हम उसको ऐसे देखते है। तो फिर ये कन्फ़्यूज़न बढ़ गया क्योंकि मुझे लगता था कि जीवात्मा जो है वही परमात्मा का अंश है। और इसी वजह से सभी जीव जो हैं वो आपस में जुड़े हुए हैं।
आचार्य प्रशांत: अच्छा, अंश माने हिस्सा?
प्र: जी सर।
आचार्य: किसी चीज़ का हिस्सा कर सकें इसके लिए वो चीज़ क्या होनी चाहिए?
प्र: होनी चाहिए।
आचार्य: चीज़ होनी चाहिए। और मटेरियल (भौतिक) होनी चाहिए, फाइनाइट(सीमित) होनी चाहिए। सिर्फ़ फाइनाइट का ही हिस्सा करा जा सकता है न। दो होते हैं जिनके हिस्से नहीं हो सकते— शून्य और इन्फिनिटी (असीम)। इनके आप डिवीज़न नहीं कर सकते न।






