आज के युग का सबसे बड़ा अपराध - आप भी इसमें शामिल तो नहीं? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव (2023)

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी, मैंने आपसे पहले भी कंज़म्प्शन (उपभोग) से सम्बन्धित प्रश्न पूछा था और आपने कहा था कि अगर किसी सही काम के लिए किया जा रहा है जैसे कि यहाँ पर हम जो इलेक्ट्रिसिटी यूज़ (विद्युत का उपयोग) करे रहे हैं, तो ये कंज़म्प्शन में नहीं आता अन्यथा वो कंज़म्प्शन में आएगा।
पर कंज़म्प्शन कम हो रहा है या नहीं, ये गणनात्मक रूप से स्पष्ट नहीं हो रहा है। मैंने चार-छः महीने से अपने निजी उपयोग के लिए कंप्यूटर टेबल लेने को रोक कर रखा है। कहीं-न-कहीं ये एनवायरमेंट (पर्यावरण) से जुड़ा है, क्योंकि है तो लकड़ी। तो मैं मिनिमल (कम-से-कम) कर रहा हूँ या नहीं, ये तय नहीं कर पा रहा हूँ।
आचार्य प्रशांत: नहीं, ये तय तो अरिथमैटिक (अंकगणित) कर देगी। ठीक है? इसके लिए आपको अध्यात्म नहीं अंकगणित चाहिए। भई, भोग की जहाँ तक बात है, वो गिना जा सकता है न। तो गिन लीजिए कि आप कितना भोग कर रहे हो। आपकी कुल ज़िंदगी कितने कंज़म्प्शन पर आधारित है वो तो आप सीधे-सीधे जोड़-घटाव से जान सकते हो, उसमें क्या समस्या है?
प्र: समस्या अब ये है कि जैसे कुछ भी चीज़ दिखती है तो मुझे लगता है कि मैं नहीं लेता तो भी मेरा काम चल जाता। फिर कभी लगता है कि नहीं, मुझे इसकी ज़रूरत भी थी तो मिनिमल नहीं हो रहा है। और मैं ये अपने स्तर तक नहीं सोच रहा हूँ, मैं सब के हिसाब से पूछ रहा हूँ कि ये कैसे कम होगा?
आचार्य: ये देखकर के कि सबसे ज़्यादा कंज़म्प्शन



