कोई आदत अच्छी नहीं होती; ‘अच्छी आदत’ जैसा कुछ नहीं होता है। एक आदमी सुबह उठते ही वॉक पर निकल जाता है — न सोचा, न समझा। उसकी मूल आदत वॉकिंग नहीं है, मूल आदत है न सोचना, न समझना। जो कुछ अंधेपन या बेहोशी में किया जाए, वही आदत है। आप जो कुछ कर रहे हो, देखो कि वो आदतवश ही हो रहा है। एक बार यह देख लोगे, तो कर्ता बदल जाता है।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: नमस्ते आचार्य जी, मेरा नाम निधि है और मैं एक आई.टी. प्रोफ़ेशनल हूँ। आई फील वेरी ऑनर्ड टू बी एबल टू स्पीक टू यू। थैंक यू फ़ॉर दिस अपॉर्च्युनिटी। मेरा क्वेश्चन है कि जैसे स्टडी के अनुसार 21 दिन तक किसी भी चीज़ को दोहराया जाए तो वो एक आदत बन जाती है। तो अगर हम किसी भी चीज़ को बार-बार दोहराएँ, तो क्या कर्ता को बदला जा सकता है?
आचार्य प्रशांत: कर्ता पहले भी वो था जो बेहोशी में आदतें उठाता था, 21 दिन बाद एक प्रकरण और खड़ा हो गया बेहोशी में आदत उठाने का। पहला दिन आपको पता था न कि आप वो हो जो 21 बार के दोहराव के बाद आदत बना लोगे? पहले ही दिन जानते थे न? जानते थे कि नहीं जानते थे? तभी तो शुरुआत करी। पहले दिन ही आप जानते थे कि 21 दिन करा तो आदत बन जाएगी। है न? ऐसे आप पहले ही दिन थे, थे कि नहीं थे? हाँ या ना?
प्रश्नकर्ता: हाँ।
आचार्य प्रशांत: और इक्कीसवें दिन क्या हुआ?




