वीडियो जानकारी: 13.09.25, वेदांत संहिता, ग्रेटर नोएडा Title : जब पापा मानने को तैयार न हों || आचार्य प्रशांत (2025) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में एक महिला प्रश्नकर्ता पूछती है कि वह अपने पिता को ज्योतिष और कर्म के बहानों से बाहर क्यों नहीं निकाल पा रही। आचार्य जी स्पष्ट करते है कि किसी को बदलना तभी संभव है जब वह खुद बदलना चाहे—वरना कोशिश करना बेकार ही नहीं, कई बार नुकसानदायक भी होता है। वे समझाते हैं कि सबसे असरदार तरीका है ‘दर्पण बनना’ — यानी सामने वाले को उसका ही व्यवहार उसी की तरह दिखा देना। जब व्यक्ति अपना ही चेहरा आप में देखता है, तब उसे अपनी गलती समझ आने लगती है। यह वीडियो उन सभी के लिए सहायक है जो रिश्तों में संघर्ष, मानसिक दबाव, या पारिवारिक जिद से जूझ रहे हैं। इस वीडियो में आप जानेंगे कि : – परिवार में तर्कहीनता से कैसे निपटें – कर्म, संस्कार और ज्योतिष के बहानों को कैसे समझें – किसी को सुधारने की सीमा कहाँ है – आत्म-सम्मान और दूरी का सही उपयोग