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आज़ाद जीती हूँ तो अंदर से विरोध उठता है || आचार्य प्रशांत (2025)
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6 months ago
Description

वीडियो जानकारी: 30.07.25 वेदांत संहिता, गोवा Title: आज़ाद जीती हूँ तो अंदर से विरोध उठता है || आचार्य प्रशांत (2025) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य प्रशांत उस स्थिति पर बात कर रहे हैं, जब आत्म-अवलोकन करते समय भीतर से आलोचना, गिल्ट और शर्म की आवाज़ें उठती हैं। वे बताते हैं कि ये आवाज़ें हमारी अपनी नहीं, बल्कि समाज, परिवार और अतीत के लोगों की हैं, जो हमारे भीतर बैठकर हमें लगातार कमजोर बनाती रहती हैं। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि सच्चा आत्म-अवलोकन सिर्फ खुद को देखना नहीं, बल्कि इन अंदर बैठे नकली आलोचकों को भी पहचानना है। जब हम उन्हें पहचान लेते हैं, तो उनकी पकड़ हमारे मन से ढीली पड़ने लगती है। यह वीडियो उन लोगों के लिए है जो भीतर की नकारात्मक सोच से छुटकारा पाकर अपनी असली पहचान जीना चाहते हैं।