वीडियो जानकारी: 20.11.25, रात और चाँद, चैन्नई Title : खेती के नाम पर किया गया अपराध || आचार्य प्रशांत (2025) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी खेती और प्रकृति के भ्रम पर चर्चा कर रहे हैं। आचार्य जी समझाते हैं कि खेत प्रकृति नहीं, बल्कि जंगलों के विनाश और मानव नियंत्रण का परिणाम हैं। पृथ्वी की आधी रहने योग्य ज़मीन खेती में जा चुकी है और ज़्यादातर खेती मांसाहार के लिए हो रही है। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि खेत दिखने में हरे-भरे होते हैं, लेकिन वे जैव-विविधता, कीट जीवन और जंगलों के नाश का प्रतीक हैं। पेड़ लगाकर जंगल काटने की भरपाई करना एक वैज्ञानिक और मानसिक भ्रम है। खेती, मांसाहार और अंधाधुंध विकास मिलकर पृथ्वी को विनाश की ओर ले जा रहे हैं।