वीडियो जानकारी: 08.02.2025, गीता समागम, ग्रेटर नॉएडा Title : पसंद-नापसंद: हम चुनते हैं या माहौल? || आचार्य प्रशांत (2025) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी बताते हैं कि हमारी पसंद-नापसंद वास्तव में अहंकार की बनावट है; जो हम “अपना” समझते हैं, वह अधिकांशतः संस्कारों और माहौल से आया होता है। प्रिय-अप्रिय का खेल प्रकृति का है, वह चलता रहेगा, पर असली बात यह है कि भीतर का केंद्र किसी अनुभव, वस्तु या भावना से भर न जाए। अध्यात्म में पलायन नहीं, बल्कि सजगता के साथ मानव बने रहना है। अनुभव आएँ, भीतर तक छुएँ, पर दृष्टा बना रहे,यही आत्मस्थ होना है। और जो स्मृतियाँ व “बैकग्राउंड नॉइज़” जीवन में चलती हैं, उन्हें हटाना नहीं; स्वीकार कर सही कर्म को खिलने देना है।