
पिछली तीन वीडियो सीरीज़ में हमने समझा कि:
इस वीडियो सीरीज़ में हम बात करेंगे उन दो मूल कारणों के बारे में जो जलवायु परिवर्तन की जड़ हैं। इन दो कारणों की वजह से ही यह आपदा दिन पर दिन भयावह होती जा रही है। वह दो कारण आप अब तक समझ ही गए होंगे, वे हैं:
क्या माँस खाना एक personal choice है?
मांसाहार को निजी मामला मत समझिए। एनिमल एग्रीकल्चर (मांस और डेयरी के लिए जानवरों का पालन-पोषण) ग्लोबल वॉर्मिंग के सबसे बड़े कारणों में है।
जानवरों को जबरदस्ती बड़ी संख्या में पैदा करने, खिलाने और मारने की प्रक्रिया में भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जित होता है।
विश्व की 70% खेती जानवरों के चारे के लिए होती है, जिसके कारण जंगल कटते हैं और कई प्रजातियाँ खत्म हो रही हैं।
यह व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे समाज और पृथ्वी का मुद्दा है।
उसपर से 800 करोड़ लोगों की संख्या और उनके खाने के लिए जानवरों को व्यावसायिक स्तर पर जबरन पैदा करना और काटना।
अब आपके लिए कुछ सवाल:
हैप्पीनेस मत मांगिए, जागिए
जब तक हमारे अंदर यह धारणा बैठी हुई है कि प्रकृति का, संसाधनों का, वस्तुओं का, दूसरे मनुष्यों का उपभोग करके आनंद पाया जा सकता है, तब तक हम जी नहीं पाएंगे।
यह जो भीतर हमारे धारणा बैठा दी है देह ने, समाज ने और बाज़ार ने कि जितना भोगोगे, जीवन उतना तुम्हारा सुखी और संतुष्ट रहेगा; अध्यात्म आपको इससे आज़ादी देता है।
आप मात्र शरीर नहीं, आप चेतना भी हैं। जिंदगी शरीर और शारीरिक मांगों से आगे भी कुछ है।
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