आत्मा, अनात्मा का अस्तित्व नहीं है

Thumbnail
AP Name Logo
आचार्य नागार्जुन के शून्यवाद पर आधारित (छंद-2)
पूरी श्रृंखला देखें
3 घंटे 52 मिनट
हिन्दी
विशिष्ट वीडियोज़
पठन सामग्री
आजीवन वैधता
सहयोग राशि: ₹99 ₹600
एनरोल करें
कार्ट में जोड़ें
रजिस्टर कर चुके हैं?
लॉगिन करें
छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करें
वीडियो कोर्स को साझा करें
परिचय
लाभ
संरचना

आपके लिए कुछ प्रश्न:

क्या जीवन में ऐसा लगता है कि खालीपन है? क्या जीवन में सब कुछ होते हुए भी सब अधूरा सा लगता है?

और इस अधूरापन को भरने के लिए हम क्या करते हैं?

कभी हम मॉल में खरीददारी करने चले जाते हैं, कभी महँगे होटल में दिल बहलाने चले जाते हैं, कभी पहाड़ों पर गाड़ी लेकर चले जाते हैं और कभी नदियों पर नौकविहार करने चले जाते हैं।

वजह बस एक है: कहीं से बस थोड़ा चैन मिल जाए।

हमारा भोगने का चुनाव हमेँ चैन नहीं देता उल्टा और बेचैन बना देता है। आचार्य नागार्जुन यही समझा रहे हैं कि मनुष्य बेचैनी का इलाज बाहर ढूंढता है। और ढूँढे भी क्यों न? अगर आप बाहर इलाज ढूँढने निकलेंगे तो जगत में लाखों करोड़ों ऐसे विषयों के नाम है जो आपको चैन देने का वादा करते हैं।

आचार्य नागार्जुन का रहे हैं यही भ्रम है। आपने जिसे सौ नाम दे दिए हैं। वह एक है। बस आपकी बेचैनी उसे सौ अलग अलग नाम से बुला रही है। यही अविद्या है।

अविद्या को समझा जाता है उससे लिप्त नहीं होते। यही समझाने का प्रयास आचार्य नागार्जुन ने अपने इस छंद में किया है। बेचैनी से लेकर निर्वाण तक का सफर कैसे तय करें इसका रहस्य जानें स्वयं आचार्य नागार्जुन से।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आप जिस उत्तर की तलाश कर रहे हैं वह नहीं मिल रहा है? कृपया हमारी सपोर्ट टीम से संपर्क करें।

कोई भी वीडियो श्रृंखला आचार्य प्रशांत के यूट्यूब वीडियो से कैसे अलग है?
क्या ये लाइव वीडियो हैं या इसमें पहले से रिकॉर्डेड वीडियो हैं?
वीडियो श्रृंखला के लिए सहयोग राशि क्यों रखी गयी है? यह निःशुल्क क्यों नहीं है?
सहयोग राशि से अधिक दान देने से मुझे क्या लाभ होगा?
वीडियो श्रृंखला की रजिस्ट्रेशन की प्रकिया के बाद मैं उसे कब तक देख सकता हूँ?
क्या वीडियो श्रृंखला के वीडियो को बार-बार देखने की सुविधा उपलब्ध है?
मुझे वीडियो श्रृंखला से बहुत लाभ हुआ, अब मैं संस्था की कैसे सहायता कर सकता हूँ?
130+ ईबुक्स ऍप में पढ़ें