
डॉ. अंबेडकर: संविधान-निर्माता और दलित चेतना का प्रतीक। वो शख्स जिसे भारत ने नाम तो दिया, पर उसकी असली कहानी कभी नहीं सुनाई।
कल्पना कीजिए... एक बच्चा स्कूल जाता है, लेकिन उसे क्लास में घुसने नहीं दिया जाता। पानी पीना हो तो किसी घड़े को छूने नहीं दिया जाता। टीचर भी डर के कारण उसे अलग बोरे पर बिठाते हैं।
वह बच्चा रोता नहीं। वह किताबों में डूब जाता है। और वही बच्चा बड़ा होकर कोलंबिया और लंदन से डबल पीएचडी लेता है। 50,000 किताबों वाला निजी पुस्तकालय खड़ा करता है। ऐसा अर्थशास्त्री बनता है कि नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन कहते हैं: “अंबेडकर मेरे अर्थशास्त्र के जनक हैं।”
पर सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी ऊँचाई छूने के बाद भी वह सत्ता के गलियारों में नहीं रुका। वह उन लाखों-करोड़ों लोगों के पास लौट आया जिन्हें आज भी पानी छूने नहीं दिया जाता।
अब आचार्य प्रशांत के साथ पहली बार उनकी वह कहानी सामने आ रही है जो कभी नहीं सुनाई गई।
यह सीरीज़ कोई लेक्चर नहीं। यह उस इंसान से सीधी मुलाकात है जिसने अपमान की आग को ज्ञान और न्याय की मशाल में बदल दिया।
क्लिक कीजिए। इस बार अंबेडकर आपको बिना किसी राजनीतिक चश्मे के मिलने वाले हैं।
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