Acharya Prashant Books @99 [Free Delivery]
content home
Login
पुनर्जन्म
जो है वो जाता नहीं, जो गया वो वापस आता नहीं
Book Cover
Already have eBook?
Login
eBook
Available Instantly
Suggested Contribution:
₹150
₹300
Paperback
Out of Stock
72% Off
₹149
₹550
This book will be available soon. Please check again after a few days.
Book Details
Language
hindi
Print Length
302
Description
पुनर्जन्म का विषय आत्मा, जीवात्मा, कर्म, कर्मफ़ल, जातिप्रथा आदि से संवेदनशील रूप से जुड़ा हुआ है। पुनर्जन्म को लेकर समाज में बड़ी भ्रांतियाँ रही हैं जिनके कारण भारत की चेतना का बड़ा पतन हुआ है। आचार्य प्रशांत पुनर्जन्म के विषय का शुद्ध वैदिक अर्थ करते हैं। सामाजिक रूढ़ियों की अपेक्षा वे उपनिषदों के सिद्धांतों को मान्यता देते हैं। इस कारण सामाजिक रूढ़ियों पर चोट पड़ती है, और जो लोग सत्य से अधिक अपनी मान्यताओं को मूल्य देते हैं, वो बुरा भी मान जाते हैं। हाल ही में एक समाचारपत्र ने आचार्य प्रशांत पर लिखा : ऐसा कैसे हो सकता है कि इतने लंबे समय तक हमारा समाज पुनर्जन्म के सिद्धांत का गलत अर्थ करता रहा? इतना ही नहीं, क्या वे विद्वान इत्यादि भी गलत हैं जिन्होंने पुनर्जन्म के सामान्य प्रचलित अर्थ का प्रचार किया? आचार्य जी के विकीपीडिया पेज पर भी पुनर्जन्म के विषय पर 'आलोचना' खंड में चर्चा है। बहुत सारी जिज्ञासाएँ हमारे पास इसी विषय पर आती रहती हैं। ऐसी सब जिज्ञासाओं को शांत करने व पुनर्जन्म आदि के बारे में उपनिषदों के मत को पूरी तरह स्पष्ट करने हेतु पुस्तक 'पुनर्जन्म' आप तक लाई जा रही है। आचार्य जी का मानना है कि समाज में पुनर्जन्म को लेकर जो मान्यता है वह उपनिषदों व श्रीमद्भगवद्गीता की मूल शिक्षा से मेल नहीं खाती। और हमारी भ्रांत सामाजिक मान्यता ने भारत का आध्यात्मिक, सामाजिक व राजनैतिक रूप से बड़ा नुकसान किया है।
Index
1. कर्मफल और पुनर्जन्म: क्या कहता है वेदांत 2. मरने के बाद हम कहाँ जाते हैं? हमारा क्या होता है? 3. पुनर्जन्म किसका होता है, और कहाँ? 4. क्या पूर्वजन्मों के कर्मों का फल इस जन्म में मिलता है? 5. क्यों कहते हैं कि व्यक्ति अपने पूर्वजन्मों का फल भोगता है? 6. क्या अपने पिछले जन्म को जाना जा सकता है?
View all chapters