कर्मयोग (Karmyog)

कर्मयोग (Karmyog)

श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय ३ पर आधारित
4.7/5
7 Ratings & 1 Reviews
Gifting available for eBook & Audiobook Add to cart and tap ‘Send as a Gift’
eBook Details
Hindi Language
Description
विश्व भर में श्रीमद्भगवद्गीता को अध्यात्म का पर्याय माना जाता है। यहाँ तक कहा गया है कि जीवन से जुड़े हर प्रश्न का उत्तर इस ग्रन्थ में समाहित है। श्रीकृष्ण द्वारा वर्णित कुछ मुख्य विषयों की सूची बनायी जाए तो उसमें 'कर्मयोग' का स्थान श्रेष्ठ रहता है। यह पुस्तक आचार्य प्रशांत द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय ३ 'कर्मयोग' पर दी गयी व्याख्याओं पर आधारित है। वैसे तो यह ग्रन्थ अति प्राचीन है परन्तु आचार्य प्रशांत द्वारा की गयी व्याख्या इसको आज की पीढ़ी के लिए अत्यन्त सरल व प्रासंगिक बना देती है।
Index
CH1
कृष्ण द्वारा अर्जुन को कर्मयोग की शिक्षा (श्लोक 3.1-3.7)
CH2
बड़ा मुश्किल है कृष्ण से प्रेम कर पाना
CH3
यदि ज्ञान ही श्रेष्ठ है तो कर्म की क्या आवश्यकता?
CH4
यज्ञ क्या है? हम अपने जीवन को ही यज्ञ कैसे बना सकते हैं? (श्लोक 3.9)
CH5
निष्काम कर्म का महत्व (श्लोक 3.11-3.12)
CH6
बिना फल की इच्छा के कर्म क्यों करें? (श्लोक 3.10)
Select Format
Share this book
Have you benefited from Acharya Prashant's teachings? Only through your contribution will this mission move forward.
Reader Reviews
4.7/5
7 Ratings & 1 Reviews
5 stars 85%
4 stars 0%
3 stars 14%
2 stars 0%
1 stars 0%