Acharya Prashant (AP) Books | पानी में मीन प्यासी | Paani Mein Meen Pyaasi
पानी में मीन प्यासी | Paani Mein Meen Pyaasi
संपूर्ण भजन पर व्याख्या
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Paperback Details
HindiLanguage
142Print Length
Description
“पानी में मीन प्यासी, मोहे सुन सुन आवे हाँसी।”
कबीर साहब के भजन की इस सुंदर, करुणा-भरी और सरल पंक्ति में गहराई भी है और एक स्नेहिल हास्य भी — जो सीधे हृदय को छूता है। असल में ये हँसी केवल मछली पर नहीं, हम सबकी उलझी हुई स्थिति पर है।
जल में जन्मी, जल में पली मीन — यदि वह भी जल को तरसे, तो यह केवल आश्चर्य की बात नहीं, चिंतन की भी बात है। यह पंक्ति असल में हमारी ही तलाश, हमारी ही प्यास, और हमारे ही भ्रमों का आईना है।
जो चाहिए, वह बाहर नहीं मिलेगा, फिर भी हम दौड़ते रहते हैं — कभी संबंधों में, कभी वस्तुओं में, कभी उपलब्धियों में — और हर बार खाली लौटते हैं।
क्या कारण है इस बेचैनी भरी दौड़ का? क्या कारण है इस प्यास का? और कैसे मिटेगी ये प्यास?
कबीर साहब के इस अनुपम भजन में मानव-मन की बेचैनी के प्रति व्यंग्य के साथ-साथ उसके इन प्रश्नों के करुणा से भरे समाधान भी हैं। जिन्हें इस पुस्तक में आचार्य प्रशांत ने बहुत सटीकता से खोला है। आचार्य जी ने हर पंक्ति को वेदांत के आलोक में अत्यंत सरल, सजीव भाषा में स्पष्ट किया है।
Index
CH1
प्रकृति हमारी साथी है, दुश्मन नहीं
CH2
हमारी पसंद ही हमारा नर्क है
CH3
सत्य माध्यम से नहीं मिलेगा
CH4
टुकड़े से जुड़े तो कामना और पूरे से जुड़े तो प्रेम
अपने ही भीतर छिपे सत्य को पहचानने वाली गहरी पुस्तक ,यह किताब बताती है कि जिस सत्य और शांति को हम बाहर खोजते हैं, वह पहले से ही हमारे भीतर मौजूद है।
पानी में मीन प्यासि” एक बेहद गहरी और भावनात्मक पुस्तक है, जो कबीर साहब के भजनों के माध्यम से जीवन की सच्चाइयों को सामने लाती है। इस किताब को पढ़ते हुए मुझे बार-बार यह एहसास हुआ कि हम जिस चीज़ की तलाश बाहर करते हैं, वह असल में हमारे अंदर ही मौजूद है।
किताब की भाषा सरल है, लेकिन उसके अर्थ बहुत गहरे हैं। हर भजन और उसकी व्याख्या हमें अपने जीवन, इच्छाओं और भ्रमों पर सोचने के लिए मजबूर करती है।
मुझे सबस...