यदि ईश्वर सबकी सभी माँगें पूरी कर दें तो क्या होगा? || (आचार्य प्रशांत, 2018)

Acharya Prashant

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यदि ईश्वर सबकी सभी माँगें पूरी कर दें तो क्या होगा? || (आचार्य प्रशांत, 2018)

प्रश्न : यदि ईश्वर सबकी सभी माँगें पूरी कर दें, तो क्या होगा?

आचार्य प्रशांत: तो ईश्वर का अस्तित्व मिट जाएगा।

ईश्वर और जीव एक ही द्वैत के दो सिरे हैं। ईश्वर जीव की कामना है; ऐसी कामना जिससे वो सोचता है कि अन्य कामनाओं की पूर्ति हो जाएगी।

जीव कहता है कि ‘जीव’ ईश्वर की रचना है, पर जीव का ‘ईश्वर’ भी जीव की ही कल्पना है। जीव ईश्वर का काल्पनिक उपयोग करता है अपनी कामनापूर्ति के लिए।

जब तक जीव की कामनाएँ शेष हैं, तभी तक ईश्वर का अस्तित्व शेष है।

जब जीव कामनामुक्त को जाता है, तो ‘आत्मा’ कहलाता है। तब ईश्वर शेष नहीं रहता, मात्र ब्रह्म बचता है। भीतर आत्मा, बाहर ब्रह्म। और भीतर-बाहर एक समान माने – ‘अहं ब्रह्मास्मि’, या ‘अयं आत्मा ब्रह्म’।

ईश्वर और जीव अलग-अलग हैं ; द्वैत हैं, कामनाजन्य हैं। ब्रह्म और आत्मा एक हैं ;अद्वैत हैं, निष्काम हैं।

This article has been created by volunteers of the PrashantAdvait Foundation from transcriptions of sessions by Acharya Prashant
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