आप तो किसी को समर्पित नहीं हो, न सच को, न झूठ को। आप दोनों को आधे-आधे हो, झूठा आदमी आपसे हमेशा जीतेगा।
यह सारांश AI द्वारा तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह समझने के लिए कृपया पूरा लेख पढ़ें।
प्रश्नकर्ता: दुनिया के जितने बुरे लोग हैं, वो तो इतनी हिम्मत से, निडर होकर के और ग़लत स्वार्थों पर ही बहुत ज़ोर से अड़े हुए हैं और मस्त लड़ रहे हैं। लेकिन मैं अपने आप को देखती हूँ, तो मुझे डर दिखाई देता है और बेईमानी दिखाई देती है। तो ये दुनिया-भर के जो ग़लत लोग हैं, अहंकारी हैं, उनमें इतनी हिम्मत और ताक़त कहाँ से आ जाती है? और मैं ऐसी क्यों हूँ कि सच्चाई के लिए भी लड़ने से मैं एकदम रुक जाती हूँ, सत्य के प्रति समर्पित नहीं हो पाती हूँ, निडर नहीं हो पाती हूँ?
वो भी स्वार्थी हैं, पर वो अपने स्वार्थ के लिए जम के लड़ रहे हैं। स्वार्थी मैं भी हूँ, पर मैं इतनी रुकी हुई हूँ। व्हाट इज़ दैट ड्राइविंग फ़ोर्स इन देम ऐंड व्हाट इज़ दैट व्हिच इज़ कीपिंग मी बिहाइंड ऐंड पुलिंग मी बैक।
आचार्य प्रशांत: कुछ नहीं है, उनके सच के साथ कोई तार नहीं जुड़े हुए हैं। तो उनके स्वार्थों की दिशा में बढ़ने से रोकने वाला उन्हें कोई नहीं है न। वो एक ही नाव पर सवार हैं। उन्हें सच्चाई से कुछ लेना ही-देना नहीं है। एक नाव है उनके पास, झूठ की, स्वार्थ की, फ़रेब की, हिंसा की—किसी भी तरीक़े से अपनी मौज। एक ही नाव है। जो एक नाव पर होगा, भले ही ग़लत दिशा में जा रहा हो, बड़ी गति से जाएगा। है न?
आप सब लोगों की पूरी कम्युनिटी की समस्या ये है कि आप दो नाव पर सवार हो। स्वार्थ की भी नाव और सच की भी नाव। तो आप हमेशा हारोगे। आपका मुक़ाबला जब भी होगा किसी झूठे आदमी से, आप हमेशा हारोगे। क्योंकि झूठा आदमी कम से कम झूठ को पूरी तरह समर्पित है।




